Sri Ganganagar News : करीब डेढ़ माह की लंबी नहरबंदी के बाद रविवार को आखिरकार इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) का पानी सूरतगढ़ क्षेत्र में पहुंच गया। रविवार दोपहर करीब 12 बजे पानी सूरतगढ़-बीकानेर नेशनल हाईवे-62 स्थित मुख्य पुल 236 आरडी को पार कर गया।
सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर)। करीब डेढ़ माह की लंबी नहरबंदी के बाद रविवार को आखिरकार इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) का पानी सूरतगढ़ क्षेत्र में पहुंच गया। रविवार दोपहर करीब 12 बजे पानी सूरतगढ़-बीकानेर नेशनल हाईवे-62 स्थित मुख्य पुल 236 आरडी को पार कर गया। नहर में पानी पहुंचते ही किसानों और आमजन के चेहरों पर खुशी लौट आई। लंबे समय से सूखे पड़े खेतों में अब फिर से हरियाली की उम्मीद जग गई है।
सिंचाई विभाग के अनुसार 1 अप्रेल से नहरबंदी लागू की गई थी। इस दौरान नहर की सिल्ट सफाई, टूटी पटड़ियों की मरम्मत, रेगुलेटरों के रखरखाव और अन्य तकनीकी कार्य किए गए। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नहर की बेहतर जल वहन क्षमता और सुचारू संचालन के लिए यह कार्य आवश्यक था।
विभाग के अनुसार 15 मई को नहर में पानी छोड़ा गया था, जो रविवार दोपहर 12 बजे के करीब 236 आरडी क्रॉस कर गया। जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हरिके बैराज से नहर में करीब 10 हजार 800 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जल संसाधन विभाग उत्तर हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी ने बताया कि पहले पानी की मात्रा कम होने से रफ्तार धीमी थी, लेकिन अब पानी की मात्रा बढ़ा दी गई है, जिससे प्रवाह तेज गति से आगे बढ़ रहा है। विभाग का अनुमान है कि अगले 48 घंटों में पानी टेल क्षेत्र तक पहुंच जाएगा।
इससे सूरतगढ़ के साथ-साथ रावला, घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्र के हजारों किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई से पहले पर्याप्त सिंचाई पानी मिल सकेगा। किसान अब नरमा, ग्वार और अन्य फसलों की तैयारी में जुट गए हैं।
दूसरी ओर नहरबंदी के कारण पिछले डेढ़ माह से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही थी। कई जगह एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई दी जा रही थी। अब नहर में पानी पहुंचने के बाद पेयजल व्यवस्था में भी जल्द सुधार होने की उम्मीद है।
जलदाय विभाग के सहायक अभियंता अजय सहारण ने बताया कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) की 236 आरडी पर पानी पहुंच चुका है तथा अगले 15 से 20 घंटों में जल भंडारण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद आगामी तीन दिनों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य कर दिया जाएगा।