
श्रीगंगानगर। ग्रामीण इलाकों में रंगीन कुर्सियों की खरीद में एक दो लाख नहीं बल्कि लाखों रुपए की गड़बड़ी अब तक सामने आई है। पूरे जिले में नब्बे ग्राम पंचायतों ने इस रंगीन कुर्सियों की खरीद की। बिना अनुमति खरीद इस प्रकरण की जांच जिला परिषद की सीईओ आईएएस महिला अफसर चिन्मयी गोपाल ने जब शुरू की है तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है।
श्रीगंगानगर पंचायत समिति की तीन ग्राम पंचायतों में रंगीन कुर्सियों का मामला पकड़ में आया तो पूरे जिले की ग्राम पंचायतों का रिकॉर्ड खंगालने के लिए जिला परिषद के अधिकांश अधिकारियों को इस जांच में लगा दिया है। विधानसभा चुनाव के कारण इन जांच अधिकारियों की डयूटी होने के कारण यह जांच पूरी नहीं हो रही है। लेकिन अब तक श्रीगंगानगर, रायसिंहनगर, सूरतगढ़ और श्रीकरणपुर पंचायत समिति क्षेत्र के गांवों में इन रंगीन कुर्सियों की खरीद में हुए जमकर भ्रष्टाचार के मामले सामने आने लगे है। श्रीगंगानगर और रायसिंहनगर क्षेत्र में एक कुर्सी लागत से कई गुणा अधिक ऊंचे दामों में खरीद की गई है। प्रारभिंक जांच के दौरान यह पहलू सामने आया है।
जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी चिन्मयी गोपाल के आदेश पर जांच शुरू हुई है। जिले की करीब अस्सी से एक सौ ग्राम पंचायतें एेसी है जिन्होंने बिना अनुमति लिए इन रंगीन कुर्सियों की खरीद कर डाली। यहां तक कि एक कुर्सी की लागत करीब ढाई हजार रुपए संबंधित फर्म संचालक ने दी लेकिन कमीशन के इस खेल में यह कुर्सी ग्राम पंचायतों के बिलों में छह हजार पार कर चुकी है।
यहां तक कि कई ग्राम पंचायतों के सरपंचों और ग्राम सेवकों ने तो एक कुर्सी के दाम बारह हजार रुपए का बिल बनवाकर उठा लिया। ग्राम पंचायतों में सप्लाई की गई इन सीमेंटेड कुर्सियों का विवरण जेम पोर्टल पर कोई विवरण नहीं है। जेम पोर्टल पर सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद की जाने वाली प्रत्येक वस्तु व उसकी कीमत दर्ज है। इससे बाहर जाकर कोई भी सरकारी एजेंसी खरीद नहंी की सकती। कुर्सियों का विवरण ना तो जेम पोर्टल पर दर्ज है तथा ना ही बीएसआर दरों में इसका निर्धारण किया गया है। इसके अलावा कुर्सियों की खरीद के लिए किसी प्रकार की प्रशासनिक, वित्तीय अथवा तकनीकी स्वीकृति जारी नहीं की गई है।
इस मामले के संबंध में सीईओ का कहना है कि जांच अभी विचाराधीन है, पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इधर, परिषद के अधिकारियों ने इस खरीद से जुड़े पहलूओं के बारे में फीडबैक लिया है। लेकिन जांच टीम में शामिल अधिकारियों का कहना था कि पूरे प्रकरण की जांच चल रही है, इसमें ग्राम विकास अधिकारी और संबंधित सरपंचों के नाम से कमीशन अधिक हावी रहा है।
ग्राम पंचायतों में सप्लाई की गई इन सीमेंटेड कुर्सियों का विवरण जेम पोर्टल पर कोई विवरण नहीं है। इन पंचायतों में यह खरीददारी जिले की पदमपुर, सूरतगढ़, अनूपगढ़, घडसाना, श्रीविजयनगर, श्रीकरणपुर, रायसिंहनगर, सादुलशहर, श्रीगंगानगर पंचायत समितियों में इन कुर्सियों की खरीद का खेल चल रहा है। बिना स्वीकृति जारी किए हर पंचायत पर अस्सी हजार रुपए से लेकर साढ़े चार लाख रुपए की खरीद की गई है।