
Fake Drug Racket: नशा तस्कर अश्विनी शर्मा के खिलाफ कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। श्रीगंगानगर शहर सदर पुलिस पहले से ही 4.68 लाख नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामदगी के मामले में उसकी तलाश कर रही है। वहीं सोमवार को इसी आरोपी के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया गया है।
हिमाचल प्रदेश स्थित विनमैक्स हेल्थकेयर फर्म के संचालक शशिभूषण काजल ने अपनी फर्म के नाम और ब्रांड का कथित रूप से दुरुपयोग कर नकली एवं कथित नशीली दवाइयों के निर्माण और बिक्री का आरोप लगाते हुए सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है।
हरियाणा के पानीपत निवासी एवं विनमैक्स हेल्थकेयर के संचालक शशिभूषण काजल पुत्र धर्मपाल ने अपनी रिपोर्ट में श्रीगंगानगर निवासी अश्वनी शर्मा, जेएमडी ट्रेडर्स के प्रोपराइटर इकबाल सिंह तथा अन्य व्यक्तियों पर उनकी फर्म के नाम से कथित रूप से नकली एवं नशीली दवाइयों का निर्माण, भंडारण, परिवहन और विक्रय करने का आरोप लगाया है।
रिपोर्ट में काजल ने बताया कि उनकी फर्म विनमैक्स हेल्थकेयर, विलेज जोहरान, त्रिलोकपुर रोड, कालाआंब, तहसील नाहन, जिला सिरमौर (हिमाचल प्रदेश) स्थित है, जो 4 मार्च 2025 को ड्रग्स विभाग नाहन में पंजीकृत हुई थी और 3 मार्च 2030 तक वैध है। उन्होंने बताया कि वे वर्ष 2017-18 से अश्विनी शर्मा को जानते हैं। आरोप है कि बाद में शर्मा एवं उसके पिता के खिलाफ नकली दवाइयों के मामले में कार्रवाई होने के बाद उन्होंने उससे संपर्क समाप्त कर लिया था।
शिकायत के अनुसार वर्ष 2025 में शर्मा ने पुनः संपर्क कर जेएमडी ट्रेडर्स के नाम से दवा कारोबार शुरू करने की जानकारी दी और विभिन्न मोबाइल नंबरों से संपर्क कर दवाइयां मंगवानी शुरू कर दीं। शशिभूषण काजल का आरोप है कि उन्होंने 10 मई 2025 से 29 जनवरी 2026 तक करीब एक करोड़ रुपए मूल्य की 35 लाख टैबलेट और कैप्सूल बेचे, जिनमें से लगभग 80 लाख रुपए का भुगतान प्राप्त हुआ, जबकि करीब 20 लाख रुपये अभी भी बकाया हैं।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अश्वनी शर्मा ने विनमैक्स हेल्थकेयर के नाम से कथित रूप से नकली दवाइयां तैयार कर बाजार में बेचीं। इस संबंध में शशी भूषण काजल ने 2 अप्रैल 2026 को ड्रग्स विभाग अंबाला कैंट में शिकायत की थी, जिसके बाद विभाग ने जेएमडी ट्रेडर्स के प्रतिष्ठान पर कार्रवाई कर निरीक्षण किया तथा सैंपल लिए। परिवादी ने बताया कि उन्होंने 16 अप्रैल 2026 को औषधि नियंत्रण विभाग श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ एवं सिरसा को भी शिकायत भेजी थी।
शशी भूषण काजल का दावा है कि संबंधित बैच नंबरों की दवाइयां उन्होंने वैध बिलों के माध्यम से विभिन्न फर्मों को बेच दी थीं तथा प्रकरण में बरामद दवाइयां उनकी फर्म की नहीं हैं। उनका आरोप है कि उनकी फर्म के नाम, पैकेजिंग और ब्रांड का प्रतिरूपण कर फर्जी तरीके से नकली दवाइयों का निर्माण और विक्रय किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि अश्विनी शर्मा, इकबाल सिंह एवं अन्य व्यक्तियों ने कथित रूप से उनकी फर्म की प्रतिष्ठा धूमिल करने, अनुचित लाभ अर्जित करने तथा आमजन को भ्रमित करने के उद्देश्य से यह षड्यंत्र रचा। मामले की जांच निरीक्षक सुभाष चन्द्र को सौंपी गई है।