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श्रीगंगानगर।
कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले इस जिले की धान मंडियों में हादसों को न्यौता दिया जाता रहा है। पदमपुर में रविवार को हुए हादसे के बाद कृषि विपणन विभाग के क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक सुभाष सहारण सहित अनेक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं, जांच शुरू हो गई है लेकिन सवाल उठता है कि कृषि जिन्सों के खरीद-बेचान के लिए बनी मंडियों में अन्य आयोजनों की स्वीकृति ही क्यों जारी की जाती है।
जिला मुख्यालय की नई धान मंडी मेें मुख्यमंत्री की सभा हो चुकी है, अनेक बड़े धार्मिक आयोजन के लिए मंजूरी दी जा चुकी है। ऐसा जिले की अन्य मंडियों में भी होता रहा है। पिछली बार यहां दशहरा आयोजन की स्वीकृति की फाइल भी चली लेकिन इसकी मंजूरी तो जारी नहीं की गई लेकिन उससे एक वर्ष पहले दशहरा जैसा बड़ा आयोजन भी यहां हुआ। बात की जाए श्रीगंगानगर की नई धान मंडी की तो इसमें 19 शैड वाले कॉमन प्लेटफार्म बने हुए हैं, बीसवें का काम चल रहा है। इनमें से अधिकतर 50 गुणा 250 फीट के है।
कॉमन शैड किसानों का कृषि जिन्स रखने के लिए ही है। यह अलग बात है कि इसमें व्यापारी भी अपना माल लगाते रहते हैं। वर्षा एवं धूप से बचाने में ये विशाल शैड कारगर हैं। कृषि जिन्सों की सरकारी खरीद के समय, जरूरत पडऩे पर खरीद एजेंसियों को अस्थाई भण्डारण के लिए भी इन्हें दिया जाता रहा है। कई मंडियों में तो अभी भी कुछ जिन्सों के ये कट्टे रखे हुए हैं।
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