
A coach teaching technical skills to an athlete and providing guidance during practice at the Maharaja Ganga Singh Sports Stadium in Sri Ganganagar
श्रीगंगानगर.एक ओर राज्य और केंद्र सरकार खेलों को बढ़ावा देने तथा ओलंपिक-2036 की तैयारियों के बड़े दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर श्रीगंगानगर के महाराजा गंगासिंह स्टेडियम में खिलाडिय़ों को प्रशिक्षकों का अभाव झेलना पड़ रहा है। जिले में विभिन्न खेलों के लिए अनुबंध पर कार्यरत 11 कोच का कार्यकाल 28 फरवरी को समाप्त हो गया,लेकिन चार माह बाद भी नए टेंडर जारी नहीं हुए हैं। इससे खेलों के हब माने जाने वाले श्रीगंगानगर में प्रशिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो गई है। जिले में एथलेटिक्स, खो-खो, जूडो, वुशु, आर्चरी, पावर लिफ्टिंग और हैंडबॉल के लिए तीन अंतरराष्ट्रीय तथा आठ एनआइएस प्रशिक्षक सेवाएं दे रहे थे। इनके मार्गदर्शन में खिलाडिय़ों ने राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया। खो-खो में राष्ट्रीय स्तर पर पदक मिले, जूडो के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप तक पहुंचे और वुशु के कई खिलाडिय़ों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरियां भी मिलीं।वर्तमान में स्टेडियम में केवल दो नियमित कोच ही कार्यरत हैं। इनमें बास्केटबॉल के हरजिंदर सिंह और एथलेटिक्स के सुरेंद्र बिश्नोई शामिल हैं। ऐसे में खो-खो, जूडो, वुशु, हॉकी, कबड्डी और वॉलीबॉल जैसे खेलों के खिलाड़ी विशेषज्ञ प्रशिक्षण से वंचित हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मैदान और उपकरणों से खिलाड़ी तैयार नहीं होते। तकनीकी प्रशिक्षण, अनुशासन और रणनीति के लिए प्रशिक्षित कोच जरूरी हैं।
स्थिति यह भी है कि वर्ष 2012 के बाद नियमित कोचों की कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई। एनआइएस कोच 20 हजार और अंतरराष्ट्रीय कोच 25 हजार रुपए मानदेय पर सेवाएं दे रहे थे। अनुबंध समाप्त होने के बाद कुछ कोच का एक माह का भुगतान भी लंबित बताया जा रहा है। खिलाडिय़ों और खेल प्रेमियों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में खेल संस्कृति को मजबूत करना चाहती है तो रिक्त पदों पर जल्द नियुक्तियां कर प्रशिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
श्रीगंगानगर खेल प्रतिभाओं की नर्सरी रहा है। यहां प्रशिक्षकों की कमी केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि खिलाडिय़ों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। यदि सरकार खेलों में उत्कृष्टता चाहती है तो जिला स्तर पर कोचों की उपलब्धता को प्राथमिकता देनी होगी। बिना प्रशिक्षक के पदक जीतने की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।
पिछले चार माह से नया अनुबंध नहीं हुआ है। इससे खिलाडिय़ों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। एक माह का भुगतान भी लंबित है।
-सुरेंद्र सिंह, खो-खो कोच
अनुबंधित कोच का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और नए टेंडर अभी नहीं हुए हैं। उपलब्ध संसाधनों से खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
-सुरेंद्र बिश्नोई, जिला खेलकूद अधिकारी, श्रीगंगानगर
Updated on:
16 Jun 2026 01:36 pm
Published on:
16 Jun 2026 01:36 pm
