
Indian Railway: अम्बाला से चलकर श्रीगंगानगर जाने वाली पहली इलेक्ट्रिक गाड़ी अबोहर रेलवे स्टेशन पर पहुंची (फोटो-पत्रिका)
अबोहर। बठिंडा-श्रीगंगानगर रेलखंड पर लंबे इंतजार के बाद आखिरकार इलेक्ट्रिक इंजन से यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है। रविवार से इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन के तहत ट्रेनों ने दौड़ना शुरू किया, जिससे रेलवे संचालन को नई गति मिली है और यात्रियों में उत्साह देखा गया। सुबह अम्बाला से चलकर श्रीगंगानगर जाने वाली ट्रेन जैसे ही अबोहर रेलवे स्टेशन पर इलेक्ट्रिक इंजन के साथ पहुंची, यात्रियों ने इस बदलाव का स्वागत किया।
उत्तर-पश्चिम रेलवे द्वारा 10 जून को जारी आदेश के अनुसार 13 जून से इस रेलखंड की चार प्रमुख ट्रेनों को इलेक्ट्रिक इंजन से चलाने की घोषणा की गई थी, जिसे अब लागू कर दिया गया है। इन ट्रेनों में दिल्ली-श्रीगंगानगर इंटरसिटी, श्रीगंगानगर-ऋषिकेश (हरिद्वार), सराय रोहिल्ला-बीकानेर एक्सप्रेस और अम्बाला-श्रीगंगानगर ट्रेन शामिल हैं।
पूर्व स्टेशन मास्टर एवं मंडल रेलवे उपभोक्ता सलाहकार समिति के सदस्य सुशील गोयल ने बताया कि इलेक्ट्रिक इंजन के संचालन से अब बठिंडा में इंजन बदलने की आवश्यकता समाप्त हो गई है, जिससे यात्रा समय में लगभग एक से डेढ़ घंटे तक की बचत संभव होगी। उन्होंने कहा कि ट्रेनों की गति बढ़ने के साथ समयपालन में भी सुधार होगा।
गौरतलब है कि बठिंडा-श्रीगंगानगर के बीच लगभग 127 किलोमीटर लंबे रेलखंड का इलेक्ट्रिफिकेशन कार्य करीब 116.75 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया था। यह कार्य कुछ माह पूर्व ही पूरा कर लिया गया था, जिसके बाद ट्रायल भी सफलतापूर्वक किए गए थे। बल्लूआना में ट्रैक्शन सब स्टेशन (टीएसएस) का निर्माण अंतिम चरण में था, जिसे अब पूरा कर लिया गया है, जिससे इस रूट पर निर्बाध बिजली आपूर्ति संभव हो सकी है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस इलेक्ट्रिफिकेशन से केवल यात्री ट्रेनों की रफ्तार ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि मालगाड़ियों के संचालन में भी सुधार आएगा। इसके साथ ही भविष्य में अबोहर होते हुए लंबी दूरी की और अधिक ट्रेनों के संचालन की संभावना भी मजबूत हुई है।
स्थानीय यात्रियों और रेलवे अधिकारियों ने इस कदम को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन से न केवल यात्रा तेज और सुविधाजनक होगी, बल्कि डीजल की खपत कम होने से पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही रेलवे की परिचालन लागत घटने से आर्थिक लाभ भी मिलेगा। रेल रूट पर इंजन बदलने का झंझट खत्म हो जाएगा।
Published on:
14 Jun 2026 10:10 pm
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