
गंगनहर के हिस्से के पानी में कटौती। पत्रिका फाइल फोटो
श्रीगंगानगर। गंगनहर के हिस्से के पानी में कटौती कर पंजाब के अपनी प्रमुख सिंचाई प्रणालियों, विशेषकर सरहिंद फीडर में अतिरिक्त पानी छोड़े जाने को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। दूसरी ओर पंजाब के कई क्षेत्रों में नहरों में क्षमता से अधिक पानी चलने के कारण ओवरफ्लो की स्थिति बन गई है और नहर टूटने की आशंका के चलते किसान स्वयं निगरानी और रखवाली करने को मजबूर है। जानकारी के अनुसार सरहिंद फीडर और उससे जुड़ी शाखा नहरों में इन दिनों पानी का स्तर लाइनिंग की ऊंचाई के करीब या उससे ऊपर तक पहुंच गया है।
कई स्थानों पर नहर किनारों पर रिसाव और कटाव की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में स्थानीय किसान दिन-रात नहरों की निगरानी कर रहे हैं। गंगनहर के हिस्से के पानी में की गई कटौती पर किसान सवाल उठा रहे हैं कि जब पंजाब की नहरों में पानी संभालना मुश्किल हो रहा है, तब गंगनहर के पानी में कटौती क्यों की जा रही है। किसान संगठनों का आरोप है कि अंतरराज्यीय जल बंटवारे के निर्धारित हिस्से का पालन नहीं होने से राजस्थान के किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कटौती लंबी चली तो फसलों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि धान रोपाई के दौर में पंजाब में पानी की मांग बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन जल प्रबंधन ऐसा होना चाहिए कि किसी एक क्षेत्र को लाभ पहुंचाने के लिए दूसरे क्षेत्र के हिस्से पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। नहरों में क्षमता से अधिक पानी चलने की स्थिति भी जल प्रबंधन पर सवाल खड़े करती है। सरहिंद फीडर नहर में क्षमता से अधिक पानी चला कर पंजाब सरकार वाह वाही बटोरने का प्रयास कर रही है, लेकिन नहर के ओवरफ्लो होकर टूटने की स्थिति बनने से किसानों की नींद उड़ी हुई है।
इस बीच किसान संगठनों और कांग्रेस ने कलक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन और राज्य सरकार से पंजाब से हिस्से का पूरा पानी दिलवाने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन पर प्रशासन ने सप्ताह भर में हिस्से का पूरा पानी दिलवाने का आश्वासन दिया है। यह आश्वासन पूरा नहीं हुआ तो कलक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन का दौर चलना तय है।
Published on:
13 Jun 2026 03:20 pm
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