श्री गंगानगर

श्रीगंगानगर में 19 साल बाद बड़ा फैसला: मकान-दुकान का बदलेगा रिकॉर्ड, 60 से अधिक कॉलोनियां जांच के दायरे में

श्रीगंगानगर के 65 वार्डों में मकान, दुकान और व्यावसायिक संपत्तियों का नए सिरे से सर्वे होगा। साल 2007 के पुराने सर्वे में रिकॉर्ड की विसंगतियों के कारण यूडी टैक्स वसूली प्रभावित हो रही है। करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से सैटेलाइट तकनीक से सर्वे होगा।
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sriganganagar property survey
श्रीगंगानगर शहर की तस्वीर (फोटो पत्रिका नेटवर्क)

Sriganganagar Property Survey: श्रीगंगानगर शहर के 65 वार्डों में स्थित प्रत्येक मकान, दुकान और अन्य व्यावसायिक संपत्तियों का नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा। नगर परिषद ने यूडी टैक्स की वसूली में सामने आ रही विसंगतियों को दूर करने के लिए दोबारा प्रॉपर्टी सर्वे कराने का निर्णय किया है। इसके लिए राज्य सरकार की अधिकृत नोडल एजेंसी को अधिकृत किया जाएगा। सर्वे में सैटेलाइट और आधुनिक तकनीक की मदद से शहर की संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

बता दें कि साल 2007 में ठेका कंपनी के माध्यम से शहर की प्रॉपर्टी का सर्वे कराया गया था। उस समय कई मामलों में अलग-अलग स्वामित्व वाली संपत्तियों को एक ही भवन मानकर टैक्स निर्धारित कर दिया गया। समय के साथ इन संपत्तियों के मालिकाना हक में बदलाव हुआ और कई भवनों का विभाजन भी हो गया। इसके कारण पुराने सर्वे के आधार पर यूडी टैक्स की वसूली में लगातार दिक्कतें सामने आ रही हैं।

नगर परिषद के राजस्व अधिकारियों को पुरानी जानकारी के कारण कई बार मौके पर जाकर रिकॉर्ड का मिलान करना पड़ता है। जिन संपत्तियों को पहले टैक्स के दायरे में माना गया था, उनमें स्वामित्व के अलग-अलग हिस्से बनने के बाद कई मामले टैक्स रिकॉर्ड से बाहर हो गए।

वहीं, मकान मालिक और किराएदार बदलने से भी पुराने रिकॉर्ड की जानकारी मौजूदा स्थिति से मेल नहीं खा रही है। इन समस्याओं को देखते हुए परिषद पूरे शहर का नया सर्वे कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। सर्वे के बाद प्रत्येक प्रॉपर्टी का अद्यतन रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे यूडी टैक्स का निर्धारण और वसूली अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।

60 से अधिक प्राइवेट कॉलोनियां दायरे में

नगर परिषद सीमा में ग्रामीण क्षेत्र के नौ वार्ड भी शामिल हैं। इन वार्डों में 60 से अधिक प्राइवेट और पॉश कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। इन कॉलोनियों में बड़े ब्रांडेड कंपनियों के शोरूम, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और आलीशान कोठियां मौजूद हैं। इसके बावजूद कई संपत्तियों से यूडी टैक्स की वसूली नहीं हो रही, जिससे नगर परिषद के राजस्व को नुकसान हो रहा है। पुराने प्रॉपर्टी सर्वे में इन इलाकों की कई संपत्तियां सही तरीके से दर्ज नहीं हो पाई थीं। अब नए सिरे से होने वाले सर्वे में प्रत्येक मकान, दुकान, शोरूम और व्यावसायिक संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

इसलिए यह सर्वे करवाना जरूरी

साल 2007 में हुए प्रॉपर्टी सर्वे के बाद शहर में काफी बदलाव आया है। कई संपत्तियों का विभाजन हुआ है और उनके मालिकाना हक में भी बदलाव हुए हैं। पुराने रिकॉर्ड के कारण यूडी टैक्स की वसूली में विसंगतियां सामने आ रही हैं। सैटेलाइट और आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रत्येक मकान, दुकान और व्यावसायिक संपत्ति का रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा।
-अजय दावड़ा लक्की, सभापति, नगर परिषद श्रीगंगानगर

Updated on:
29 Sept 2026 02:36 pm
Published on:
29 Sept 2026 02:36 pm