
श्रीगंगानगर.
पंजाब के कुख्यात गेंगस्टर विक्की गोंडर और उसके दो साथियों के एनकाउंटर मामले की प्रशासनिक जांच के सिलसिले में एनकाउंटर से जुड़े अधिकारियों ने बुधवार को जांच अधिकारी अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) को बयान दर्ज करवाए। इस प्रकरण की प्रशासनिक जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से जारी गाइड लाइन के अनुसार हो रही है। एनकाउंटर में मारे गए गेंगस्टर गोंडर और उसके दो साथियों के परिजन अभी तक बयान देने के लिए नहीं आए हैं।
एनकाउंटर प्रकरण के जांच अधिकारी अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) नख्तदान बारहठ ने बताया कि गेंगस्टर के एनकाउंटर के लिए पंजाब पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित की गई थी। उन टीमों के प्रभारी बयान देने के लिए उपस्थित हुए। बयान दर्ज करने की कार्यवाही कई घंटे चली। बयान देने आए अधिकारियों के साथ पंजाब पुलिस के कई हथियारबंद जवान और कमाण्डो आए थे जो बयान की कार्यवाही पूरी होने तक जांच अधिकारी के कार्यालय के बाहर बरामदे में डेरा डाले रहे। इनके हाथों में अत्याधुनिक हथियार थे, जिन्हें कलक्ट्रेट में कार्यवश आने वाले लोग कौतूहल से देखते रहे।
पंजाब के कुख्यात गेंगस्टर विक्की गोंडर और उसके दो साथियों का एनकाउंटर इसी वर्ष 26 जनवरी की रात हिन्दुमलकोट थाना क्षेत्र के गांव पक्की के पास एक ढाणी में हुआ था। ढाणी के मालिक ने इन लोगों को शरण दे रखी थी। इसकी भनक लगने पर पंजाब पुलिस ने एनकाउंटर की योजना बनाई और राजस्थान पुलिस को सूचना दिए बगैर कार्रवाई को अंजाम दे दिया। राजस्थान पुलिस को इसकी जानकारी बाद में दी गई।
गोंडर के मारे जाने के बाद उसके परिजनों ने पंजाब पुलिस के एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी बताया था। पिछले दिनों उन्होंने श्रीगंगानगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों को दोहराया। लेकिन मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर चल रही प्रशासनिक जांच के सिलसिले में गोंडर के परिवार से अभी तक कोई बयान देने के लिए जांच अधिकारी के समक्ष पेश नहीं हुआ।