रोजाना 350-400 जने इसमें खाना खा रहे हैं। कोडा चौक पर शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के काफी मजदूर काम के लिए होते हैं।
श्रीगंगानगर.
जरूरतमंदों की सेवा की ललक रखने वाले कुछ लोगों की आपस में ऐसी बात हुई कि रोटी बैंक की 'बातÓ बन गई। लगातार 153 दिन से कोडा चौक के नजदीक दोपहर का लंगर जारी है। रोजाना 350-400 जने इसमें खाना खा रहे हैं। कोडा चौक पर शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के काफी मजदूर काम के लिए होते हैं। कई बार कुछ को मजदूरी नहीं मिलती, इनमें से कई भूखे-प्यासे, हैरान-परेशान नजर आते तो चौक के दुकानदार उन्हें खाना खिला देते। एक दिन कुछ लोगों ने राय-मशविरा कर अपने घरों से टिफिन लाना और ऐसे जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाना शुरू किया। देखते ही देखते कई और जने जुड़ गए। अब प्रतिदिन 40-50 टिफिन आते हैं, बाकि खाना चौक के पास स्थित एक होटल नो प्रोफिट-नो लोस पर बना देता है।
समर्पित टीम सक्रिय
रोटी बैंक के लिए समर्पित टीम सक्रिय रहती है। इसमें प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष सोनू अनेजा, अशोक धींगड़ा, गुरमीत गिल, संजय कौशिक, रामकुमार अरोड़ा, इन्द्रजीत नागपाल, उमेश धींगड़ा, अरविन्द जोशी, विक्रमसिंह राठौड़, यश रिंकू मिड्ढा 'बम-बम', मनोज अनेजा, किशन जुनेजा, अजय आहूजा, राधेश्याम सेतिया आदि शामिल हैं।
मिलने लगा सहयोग
रोटी बैंक को शहरवासियों का सहयोग मिलने लगा है। बीच-बीच में लोग अपने अवसर विशेष पर खाद्य सामग्री लाते हैं या आर्थिक सहयोग करते हैं। राजकुमार गौड़, प्रहलादराय टाक, प्रेम अग्रवाल, कपिल असीजा, तरसेम गुप्ता, संजीव चौहान जैसे विशिष्ट जन रोटी बैंक में आकर सराहना कर चुके हैं। शुक्रवार को संयुक्त व्यापार मंडल के महामंत्री नरेश सेतिया, रंजन जसूजा, जेपी श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।
&सभी के सहयोग से रोटी बैंक अच्छा चल रहा है। कोशिश है कि इसको लगातार जारी रखा जाए। सोनू अनेजा, अध्यक्ष, प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन
भूखे को भोजन की मुहिम सराहनीय है। अवसर विशेष पर लंगर करवाने के इच्छुकों को भी संतुष्टि
मिलती है।
सुशील शर्मा, सहायक निदेशक, कृषि विपणन विभाग
टीम वर्क से कोई काम मुश्किल नहीं है। मन में दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो शुरूआती परेशानी के बावजूद सफलता जरूर मिलती है।
विक्रमसिंह राठौड़
नेक नीयत से कोई काम प्रारम्भ किया जाए तो लोग जुड़ते चले जाते हैं। रोटी बैंक की सफलता में टीम की मेहनत एवं सभी का सहयोग है। अशोक धींगड़ा
भोजन किसी की भी पहली आवश्यकता है। इसे पूरी करना प्रशंसनीय है। आपस में सहयोग से कामयाबी जरूर मिलती है।
गुरमीत गिल