- लाइव रिपोर्ट: निर्धारित समय में अफसर-कार्मिक नहीं आते डयूटी पर
श्रीगंगानगर. प्रदेश में सरकार बदली तो इलाके में प्रशासन भी बदल गया। लेकिन सरकारी महकमों में लेटलतीफी का ढर्रा नहीं। इलाके में होली पर्व की खुमारी अब तक नहीं गई है। सरकारी महकमों में देरी से आना और जल्दी जाने की परिपाटी में बदलाव नहीं किया गया है। सरकारी ऑफिस खुलने के सुबह साढ़़े नौ बजे से लेकर सवा दस बजे तक जिला मुख्यालय पर अधिकांश ऑफिसों में कमोबेश यही हालात देखने को मिले। पत्रिका टीम ने सुबह साढ़े बजे से लेकर सुबह सवा दस बजे तक उन ऑफिसों और विभागों का स्टि्रंग ऑपरेशन किया जहां जनता की समस्याओं या फरियाद का सीधा जुड़ाव है। इन ऑफिसों में लेटलतीफी इतनी अधिक थी कि सुबह दस बजे तो इन विभागो के कैम्पस में सुबह की सफाई का दौर शुरू किया गया।
यूआईटी: कलक्टर खुद प्रशासक फिर भी लेटलतीफी
यूआईटी में जिला कलक्टर डां मंजू खुद प्रशासक है। लेकिन यूआइटी कैम्पस मेंं निर्धारित समय सुबह साढ़े नौ बजे तक अफसरों और कार्मिकों की लेटलतीफी का आलम बना हुआ था। सचिव अशोक असीजा सुबह दस बजे तक नहीं पहुंचे। वहीं नियोजन शाखा का तो सुबह दस बजे तक ताला तक नहीं खुला। इस शाखा में एटीपी के अलावा एलडीसी रणजीत नहीं आया। यही हाल मुख्य गेट से सटे नागरिक सेवा केन्द्र का था, यहां 9:47 बजे तक कोई कार्मिक नहीं आया। पट़टा बनाने की शाखा तो खुली मिली लेकिन एक भी कार्मिक नहीं पहुंचा। सहायक अभियंता राकेश सिडाना और सहायक लेखाधिकारी राजेश अरोड़ा खुद नहीं आए लेकिन वहां सफाई कार्मिक सफाई कर रहा था।
स्वास्थ्य विभाग: सुबह बजे तक अफसरों का इंतजार
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की सेहत खुद ठीक नहीं है। सुबह सवा दस बजे तक सीएमएचओ ऑफिस में खुद सीएमएचओ डा. अजय सिंगला, डिप्टी सीएमएचओ डा. मुकेश मेहता और डा. करण आर्य नहीं आए। इन तीनों अफसरों के चैम्बर भी बंद रहे। पूरे कैम्पस में सन्नाटा होली की छुट़टी की तरह नजर आया। अफसरों के लिए वाहन भी नहीं पहुंचे। इक्का दुक्का दुपहिया वाहन जरूर खड़े हुए थे। हालांकि कई कार्मिक दस बजने पर आने शुरू हो गए। लेकिन दस बजे तक चुनिंदा कार्मिक ही अपनी सीटों पर आकर होली की रामरमी करने लगे। इसी कैम्पस में कई शाखाओं में सफाई नहीं हुई। एक कार्मिक का कहनाथा कि सहायक कार्मिक नहीं होने से उन्हें खुद आकर अपने अपने कमरों की सफाई करने की मजबूरी है।
नगर परिषद. देरी से आने की नहीं बदली परिपाटी
सुबह साढ़े नौ बजे से दस बजे तक नगर परिषद कैम्पस में चुनिंदा अफसरों की आवाजाही हुई। लेखा शाखा में एक कार्मिक के अलावा अन्य नदारद रहे। सुबह दस बजे तक इस शाखा में सफाई कार्य कराया जा रहा था। इधर, निर्माण शाखा में एक्सईएन मंगतराय सेतिया, एइएन अमनदीप कौर, जेइएन शिवांगी बिश्नोई, नेहा गर्ग, एटीपी फरसाराम बिश्नोई, जेईएन सिद्धार्थ जांदू जेईएन जयश्री जीनगर नदारद रहे। इसी कैम्पस में आयुक्त भी नहीं आए हुए थे। यही हाल लेखा शाखा, स्थापना शाखा, विद्युत शाखा, भूमि विक्रय शाखा, तहबाजारी शाखा, सफाई शाखा, राजस्व शाखा आदि में अफसरों और कार्मिकों के देरी से आने की परिपाटी जारी थी। सुबह सवा दस बजे तक फरियादी भी नजर नहीं आए।
रसद विभाग: फरियाद सुनने वाले नहीं आए
लेट लतीफी से कलक्ट्रेट कैम्पस के चौबारे पर संचालित रसद विभाग भी अछूता नहीं रहा। इस ऑफिस में पत्रिका टीम पहुंची तो ऑफिस खुले करीब 37 मिनट से अधिक हो चुके थे लेकिन सुबह 10.07 बजे तक जिला रसद अधिकारी कविता सिहाग नहीं आई थी। डीएसओ के इस चैम्बर में लाइटें जल रही थी लेकिन वहां कोई भी कार्मिक नजर नहीं आया। इस चैम्बर के साथ सटे कमरे में दो कार्मिक नजर आए। डीएसओ के बारे में पूछा गया तो रटारटाया जवाब मिला कि आने वाली है, चंद मिनटो के बाद आ जाएगी।
सांख्यिकी विभाग: अफसर खुद नहीं आए, कब आएंगे पता नहीं
कलक्ट्रेट के चौबारे पर ही रसद विभाग के पास बना आर्थिक एवं सांखियक़ी विभाग भी रामभरोसे संचालित हो रहा था। पत्रिका टीम यहां पहुंची तो सुबह 10.12 बजे चुके थे लेकिन इस ऑफिस के मुख्य अफसर सहायक निदेशक मोहनलाल नहीं आए है।
महिला एवं बाल विकास विभाग: पता नहीं कब आएंगे अधिकारी
रसद विभाग के सामने महिला एवं बाल विकास विभाग संचालित किया जा रहा है। इस विभाग के माध्यम से पूरे जिले की आंगनबाड़ी केन्द्रो की मॉनीटरिंग का जिम्मा है। जब केन्द्र की मानदेय कार्मिक दस मिनट देरी से आती है तो उसकी अनुपिस्थति बताकर बकायदा नोटिस जारी होता हे। लेकिन इस विभाग के ऑफिस में मनमर्जी का आलम चल रहा था। पत्रिका टीम जब इस ऑफिस में सुबह 10.10 बजे पहुंची तो वहां उप निदेशक सुमित्रा बिश्नोई अपनी सीट पर नहीं मिली। इस संबंध में अधीनस्थ कामिकों से पूछा गया तो दो शब्द सुनने को जरूर मिले पता नहीं कब आएंगे अफसर।