श्री गंगानगर

गेहूं खरीद के लिए ऑनलाइन बुकिंग पर भड़के व्यापारी

ई-रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को निरस्त करने की उठी मांग  
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Updated: 5 Mar 2018, 8:58 PM IST
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रायसिंहनगर.

गेहूं की सरकारी खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण को लेकर व्यापारियों में आक्रोश पैदा हो गया है। व्यापारियों का आरोप है कि राज्य सरकार ने गेहूं की सरकारी खरीद के लिए ई-रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू की है। आरोप है कि ई-रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी देने वाली है। वहीं व्यापारी वर्ग के लिए भी बड़ी समस्या है। व्यापारियों के अनुसार इस साल गेहूं का बंपर उत्पादन होने की संभावना है तथा गेहूं की आवक 40 हजार क्विंटल तक पहुंच सकता है। इतनी भारी मात्रा में गेहूं की आवक होने पर ई-पंजीकरण की व्यवस्था से तुलाई में ही करीब तीन से चार माह तक का समय लग जाएगा। इसके अलावा तकनीकी समस्याओं के चलते किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण होने पर आर्थिक व्यय होने के साथ ही पंजीकरण नहीं होने पर औने पौने दामों पर फसल बेचान करना होगा। इससे व्यापारियों व किसानों को नुकसान होगा। एसडीएम को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बाबूलाल वर्मा के नाम दिए गए ज्ञापन में इस व्यवस्था को तुरंत वापस लेने की मांग की गई है।


ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में यह हैं समस्याएं

प्रकरण-एक
गांवों में बड़ी संख्या में भूमिहीन काश्तकार हिस्से अथवा ठेके पर जमीन लेकर काश्त कर रहे हैं जबकि जमाबंदी के आधार पर ऑनलाइन पंजीकरण केवल भूमिधारक का ही हो सकेगा। हिस्से या ठेके पर काश्त करने वाले काश्तकारों की फसलों का पैसा जमीन के मालिक के खाते में जाएगा। इस बात की गारंटी नहीं है कि जमीन मालिक हिस्सेदारों अथवा ठेका काश्त करने वाले काश्तकार को उसके खाते में आया पूरा पैसा वापस लौटा देगा। ऐसे में हिस्से अथवा ठेके पर काश्त करने वाले काश्तकारों के लिए बड़ी परेशानी पैदा हो गई है।

प्रकरण-2
अधिकतर काश्तकारों की तरफ बैंक का बकाया चल रहा है। इनमें राष्ट्रीयकृत बैंकों के अलावा सहकारी समितियों के खाते भी हैं। किसानों के इन खातों को पहले ही आधार कार्ड व भामाशाह कार्ड से लिंक किया जा चुका है। गेहूं की सरकारी खरीद ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से होने पर इन खातों में राशि आने पर बैंकों द्वारा ऋण की एवज में उक्त राशि किसानों को नहीं लौटाई जाएगी। इससे बैंक तो अपनी रकम पूरी कर लेंगे लेकिन किसानों को अपनी उपज की राशि नहीं मिल पाएगी। इस परिस्थिति से बचने के लिए भी काश्तकार औने पौने दामों में गेहूं का बेचान इधर उधर करेंगे।

प्रकरण-3
मूंग की खरीद पिछले साल ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत हुई थी। उसी दौरान यह समस्या सामने आई थी कि अन्तर्जिला रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा था। उस व्यवस्था में अभी तक कोई सुधार नहीं किया गया है। ऐसे में अगर किसी काश्तकार की जमीन अन्य जिले में है तो वह उस जिले में अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाएगा। क्योंकि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में आधार कार्ड अथवा भामाशाह कार्ड में दर्ज पते के आधार पर जिले का निर्धारण ऑनलाइन ही होगा। ऐसे काश्तकारों को अपनी गेहूं या तो खुद के जिले में लाकर बेचनी होगी अथवा औने पौने दामों में वहीं बेचान करनी पड़ेगी।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
इस तरह की समस्याएं हमारे सामने भी आई हैं तथा विभिन्न स्तरों पर हमने इन समस्याओं को उठाया है। ऑनलाइन खरीद में किसानों को समस्याएं नहीं आने दी जाएंगी। अगर कोई समस्या आई तो हम निस्तारण करवाएंगे।-दिनेश कुमार शर्मा, सचिव, कृषि उपज मंडी समिति रायसिंहनगर

हमने समस्याओं से अवगत करवाया है
हमने राज्य सरकार को ज्ञापन भेजकर समस्याओं से अवगत करवाया है, अगर समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो आंदोलन के सिवाय हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचता है।-सुनील पटावरी, अध्यक्ष व्यापार मंडल, रायसिंहनगर

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