कई साल पहले शहर में नगरपरिषद की ओर से लगाई गई ट्रैफिक लाइटों को चालू कराने का प्रयास एक बार फिर विफल हो गया।
श्रीगंगानगर.
कई साल पहले शहर में नगरपरिषद की ओर से लगाई गई ट्रेफिक लाइटों को चालू कराने का प्रयास एक बार फिर विफल हो गया।दीपावली से पहले नगरपरिषद की ओर से शहर की ट्रैफिक लाइटों को चालू कराने का प्रयास किया गया लेकिन कुछ नहीं हुआ।
शहर के विभिन्न चौराहों पर कई साल पहले लाखों की लागत से नगरपरिषद की ओर से दिल्ली की एक कंपनी से ट्रेफिक लाइटें लगवाई गई थीं। जो कुछ समय चलने के बाद बंद हो गई। इन लाइटों को चालू कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की विभिन्न बैठकों में मुद्दे उठते रहे। इस पर नगरपरिषद ने करीब आठ-दस माह पहले शहर की सभी ट्रैफिक लाइटों को चालू कराने के लिए कंपनी को पत्र भेजा। इस पर कंपनी ने शहर में ट्रैफिक लाइटों को चालू तो कर दिया लेकिन उनका समय निर्धारण ठीक से नहीं कर पाए और लाइटें फिर बंद हो गई। परिषद अधिकारियों ने फिर से कंपनी के लोगों को लाइट सही कराने के लिए कहा। इस पर फिर लाइटों को सही तरीके से शुरू करने के प्रयास हुए लेकिन वे भी विफल हो गए।
लाइटों को चालू नहीं करने को लेकर नगरपरिषद आयुक्त की ओर से कुछ माह पहले कोतवाली में कंपनी के लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।इसके बाद दीपावली से पहले कंपनी ने लाइटों को फिर से शुरू करने की बात कही। दीपावली से पहले बीरबल चौक पर ट्रैफिक लाइट चालू कर दी गई और लाइटों के आधार पर ट्रैफिक चालू कर दिया गया। लेकिन दो-तीन दिन चलने के बाद लाइट फिर बंद हो गई। इसके अलावा शहर की अन्य लाइटें भी चालू नहीं हुई।
समय निर्धारण में आ रही समस्या
- ट्रैफिक पुलिसकर्मियों का कहना है कि शहर में विभिन्न चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइटों को पहले कई बार चालू किया गया लेकिन उनका समय निर्धारण उनके अनुसार नहीं हो पा रहा है। इसके चलते चौराहों पर लंबे जाम की स्थिति बन जाती है। शहर में चौराहों पर सुचारु ट्रैफिक चलाने के लिए लाइटों का समय निर्धारण ट्रेफिक दबाव के अनुसान होना चाहिए, जिससे जाम की स्थिति नहीं बन सके।
इनका कहना है
- अभी ट्रैफिक लाइटें चालू नहीं हो पाई है। इसके लिए नगरपरिषद अधिकारियों से बात की जाएगी। शहर के चौराहों पर ट्रैफिक लाइटों का समय यातायात दबाव को देखते हुए निर्धारित होना चाहिए जिससे जाम की स्थिति नहीं बने।
सुशील कुमार, प्रभारी यातायात थाना श्रीगंगानगर।