-योग के साथ पेयजल संकट पर जताई चिंता
श्रीगंगानगर.
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिशासी अभियंता अर्जुन वधवा ने कहा है कि पानी की एक-एक का सदुपयोग होना चाहिए। वे राजस्थान पत्रिका के जल संरक्षण महाभियान अमृतं जलम् के तहत ऋद्धि-सिद्धि एनक्लेव में योग शिविर के दौरान हुई जल संरक्षण संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पानी की एक-एक बूंद का सोच समझ कर उपयोग किया जाए तो यह इलाके के लिए उपयोगी होगा।
उन्होंने कहा कि घरेलू उपयोग के दौरान पानी की बर्बादी की ओर ध्यान नहीं दिया जाता। यदि इस दौरान पानी का सीमित उपयोग किया जाए तो पानी की बचत हो सकती है। सभी को इस दिशा में सजग होना चाहिए और जल बचत का संकल्प लेना चाहिए। योग प्रशिक्षक बृजमोहन सचदेवा और विकास जैन ने सभी का स्वागत किया। राहुल और अंकित जैन ने आभार जताया।
महिलाएं निभा सकती हैं जिम्मेदारी
वहीं, भूप कॉलोनी के वीर सावरकर पार्क में योग शिविर के दौरान जल संरक्षण संगोष्ठी हुई। इसमे पतंजलि योग समिति के योगाचार्य श्यामसुंदर शर्मा ने कहा कि पानी बचाएंगे तो ही कल बचेगा वरना अगला विश्व युद्ध पानी के लिए ही होगा। उन्होंने कहा कि शुद्ध पानी सीमित है। इसका उपयोग सोच समझकर करें। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति के दौरान जलापूर्ति का समय कम किया गया, थोड़े समय के लिए ही कम पानी मिलने पर परिवारों में हालात बिगडऩे लगे थे, ऐसे में यदि हमने पानी नहीं बचाया तो संभव है कि हमें हमेशा ही पानी के लिए परेशान होना पड़े।
उन्होंने महिलाओं से पानी का सीमित उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की दिशा में महिलाएं बड़ी जिम्मेदारी निभा सकती हैं, वे स्वयं भी पानी का सीमित उपयोग करें तथा परिवार के सदस्यों को भी कम पानी के उपयोग के साथ दैनिक कार्य करने की आदत डालें। इससे पानी की बचत होगी। समिति के योग संदेश प्रभारी यशपाल छाबड़ा ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। समिति के संवाद प्रभारी सुरेंद्र विग, योग शिक्षक ज्ञान चंद बिलन्दी और हेमराज भी उपस्थित थे।