
श्रीगंगानगर के तहसील कार्यालय में दस्तावेजों की जांच करने पहुंची टीम (पत्रिका फोटो)
Rajasthan Sri Ganganagar Land Scam: श्रीगंगानगर जिले में निजी कॉलोनियों में भूखंडों की खरीद-फरोख्त को लेकर एक गंभीर सवाल उठ रहा है। कुछ कॉलोनियों में भूखंडों का वास्तविक बाजार मूल्य और रजिस्ट्री में दर्शाई गई कीमत के बीच भारी अंतर देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि भूखंडों की बिक्री में खरीदार से 40 से 50 लाख रुपए तक वसूले जाते हैं। लेकिन दस्तावेजों में भूखंड का मूल्य मात्र 5 से 10 लाख रुपए दर्शाया जाता है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को चपत लग रही है, बल्कि काले धन के लेन-देन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, कई कॉलोनियों में भूखंडों की वास्तविक कीमत बाजार की मांग, लोकेशन और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर तय होती है। दूसरी ओर रजिस्ट्री प्रायः डीएलसी (जिला स्तरीय समिति) दरों या उसके आसपास के मूल्य पर कराई जाती है। ऐसे में वास्तविक बिक्री मूल्य और रजिस्ट्री में दर्ज राशि के बीच का अंतर अक्सर नकद भुगतान के रूप में होने की चर्चाएं रहती हैं। हालांकि, इसकी पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियां ही कर सकती हैं।
श्रीगंगानगर में पिछले एक दशक में रियल स्टेट का कारोबार जिस तेज से फैला है, उसे देखते हुए यह जिला आयकर विभाग के रडार पर आ गया है। अकेले श्रीगंगानगर में एक दशक के दौरान 300 के करीब छोटी-बड़ी कॉलोनियां विकसित हुई हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है। यहां भी खेल भूखंड की कीमत ज्यादा वसूलने और दस्तावेजों में कम दिखाने का खेल चल रहा है।
जयपुर से आयकर विभाग की इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिंग विंग की टीम इसी खेल की परतें उघाड़ने के लिए तीन दिन से उप रजिस्ट्रार कार्यालय में डेरा डाले हुए है। टीम पिछले दो साल में हुई रजिस्ट्रियों की जांच कर रही है। दरअसल, देशभर में रियल स्टेट के कारोबार में सरकारी कोष को नुकसान पहुंचाने का खेल चल रहा है।
केंद्र सरकार ने इसी को ध्यान में रखकर 30 लाख से ऊपर की रजिस्ट्रियों में पेन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज फर्जी लगाने तथा दो लाख से ऊपर की रजिस्ट्रियों में भुगतान चेक के बजाय नकद में होने की जांच करने के निर्देश आयकर विभाग को दिए हैं। यहां आई टीम इसी की जांच कर रही है। जांच में अगर टैक्स चोरी, फर्जी दस्तावेज या संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के सबूत मिले तो संबंधित के खिलाफ आयकर अधिनियम सहित अन्य प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई होगी।
भूखंडों की खरीद में नकद भुगतान करने वाले खरीदार भी जोखिम से अछूते नहीं रहते। भविष्य में किसी विवाद, कब्जे के झगड़े या कानूनी मामले में उनके पास केवल वही राशि प्रमाणित होती है, जो रजिस्ट्री में दर्ज है। यदि वास्तविक भुगतान उससे कहीं अधिक किया गया हो तो उसे साबित करना कठिन हो सकता है।
रजिस्ट्री में कम मूल्य दर्शाने से राज्य सरकार को स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क के रूप में कम राजस्व प्राप्त होता है। वहीं, आयकर विभाग के लिए भी वास्तविक लेन-देन का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यदि बिक्री मूल्य और घोषित मूल्य में बड़ा अंतर हो तो यह कर चोरी के दायरे में भी आ सकता है।
श्रीगंगानगर के मामले में आयकर विभाग की नजर रियल स्टेट के कारोबार में हुए अरबों रुपए के निवेश पर भी नजर है। यह पैसा कहां से और किन स्रोतों से आ रहा है, यह बड़ा सवाल है। यहां के रियल स्टेट कारोबार में बॉलीवुड के निवेश की भी चर्चा होती रहती है।
शहर में लगातार विकसित हो रही निजी कॉलोनियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भूखंडों की वास्तविक बिक्री कीमत और रजिस्ट्री में दर्ज कीमत के बीच के अंतर की समय-समय पर समीक्षा की जा रही है? विशेषज्ञों का मानना है कि उप-पंजीयक कार्यालय, आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की ओर से बड़े अंतर वाले सौदों की जांच से पारदर्शिता बढ़ सकती है।
श्रीगंगानगर में तेजी से बढ़ रहे रियल एस्टेट कारोबार के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भूखंड का वास्तविक सौदा 40 से 50 लाख रुपए में हो रहा है तो दस्तावेजों में उसकी कीमत 5 से 10 लाख रुपए क्यों दिखाई जा रही है? और यदि ऐसा हो रहा है तो इस अंतर की राशि का हिसाब किसके पास है? यह ऐसा मुद्दा है, जिस पर प्रशासनिक और वित्तीय एजेंसियों की नजर जरूरी मानी जा रही है।
Updated on:
17 Jul 2026, 3:31 PM IST
Published on:
17 Jul 2026, 3:31 PM IST
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