
एसएनसीयू वार्ड में भर्ती लीला का नवजात शिशु (पत्रिका फोटो)
बांसवाड़ा: लीला मेरी बेटी से बढ़कर थी, वह असमय ही दुनिया से विदा हो गई। पर, लीला हमें आखिरी निशानी देकर गई है। उसके बेटे को हम बहुत काबिल बनाएंगे। यह कहना है जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के बाहर बैठे कानेला-मलाना निवासी रमणलाल खांट का। जिला अस्पताल में पिछले दिनों प्रसूता लीला पत्नी विजय की मौत हो गई। इसके बाद से उसका नवजात शिशु एसएनसीयू वार्ड में ऑक्सीजन सपोर्ट पर है।
बता दें कि अस्पताल में लीला के ससुर रमणलाल और उनका पूरा परिवार ‘राउड द क्लॉक’ निगरानी रख रहे हैं। लीला की बात निकालते ही उनकी आंखें नम हो जाती हैं। रमणलाल बताते हैं कि लीला पीहर में थी। बेटे विजय के पास कॉल आया था कि उसको दर्द हो रहा है तो विजय तुरंत लीला के घर गया और उसको गढ़ी अस्पताल लेकर गया। वहां एंबुलेंस से उसे जिला अस्पताल लेकर आए। पूरा परिवार यहीं था। नौ जुलाई को सिजेरियन से उसकी डिलीवरी हुई। उस समय स्वस्थ थी। पर, अगले दिन तबीयत खराब हो गई और 10 जुलाई की सुबह पौने 11 बजे वह दुनिया को छोड़ गई।
आंसू पोंछते हुए दादा रमण बताते हैं कि विजय की शादी 2025 में हुई थी। इसके बाद से परिवार में काफी खुशी थी। लीला शिक्षिका बनना चाहती थी और वह बीएड के बाद रीट पास भी हो गई थी। लीला की मौत के बाद बड़ा बेटा राजेंद्र उसकी बहू सीमा, छोटा बेटा संजय उसकी बहू और मेरी बेटी रीना लगातार हॉस्पिटल आ रहे हैं तथा लीला के बेटे की देखभाल कर रहे हैं।
10 जुलाई से मृतका लीला का नवजात एसएनसीयू वार्ड में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। एक स्वस्थ्य शिशु का जन्म के समय वजन कम से कम 2.900 ग्राम होना चाहिए। पर, लीला का नवजात मात्र 1.900 ग्राम है। जन्म के समय वह मेकोनियम से लिमटा हुआ था।
चिकित्सकों के अनुसार, लीला का गर्भ 9 महीने से ऊपर 15 दिन ऊपर हो गया था। इससे कॉम्पलिकेशन काफी बढ़ गए थे। फिलहाल, नवजात ऑक्सीजन स्पोर्ट पर है। पर, उसकी हालत सुधर रही है। उसे मदर मिल्क बैंक से दूध लाकर इंजेक्शन के सहारे दिया जा रहा है। मौजूदा उसकी हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार, औसत 100 एमएल दूध ही दे पा रहे हैं।
Updated on:
16 Jul 2026, 9:49 PM IST
Published on:
16 Jul 2026, 9:49 PM IST
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