
भीलवाड़ा के सरकारी अस्पताल में निरीक्षण करते स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर
एनीमिया के चलते प्रसुताओं की हर साल बढ़ती मौतों तथा एनीमिक मदर से नवजात शिशुओं को मिल रही बीमारियों की अनचाही सौगात को जड़ से खत्म करने के लिए प्रदेश सरकार ने नवंबर 2025 से फेरिक कार्बोक्सी माल्टीज (FCM) इंजेक्शन लगाना शुरू किया और पिंक ड्राइव अभियान चलाते हुए, वृहद स्तर पर प्रसूताओं को टीके लगाए थे। गत 5 माह से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में एफसीएम इंजेक्शन आ ही नहीं रहा है। हर माह जिला अस्पतालों से इंजेक्शन की डिमांड भेजी जा रही है, लेकिन आपूर्ति नहीं हो रही है।
प्रदेश में हर साल 15 से 16 लाख महिलाएं गर्भवती होती है और इनमें 52 से 58 फीसदी एनीमिक होने के कारण उन्हें इस इंजेक्शन की जरूरत है।
58% - प्रसूताएं है प्रदेश में एनीमिक
79% - दक्षिणी राजस्थान के जिलों की
80% - में खून की कमी संबंधित बीमारियां
15-16 लाख महिलाओं की प्रदेश में हर साल होती है गर्भवती
2.5-03 लाख महिलाओं की दक्षिणी प्रदेश में होती है डिलेवरी
एफसीएम इंजेक्शन आधुनिक आयरन रिप्लेसमेंट दवा है। इसका उपयोग मुख्य रूप से आयरन की कमी से होने वाले गंभीर एनीमिया (खून की कमी) के इलाज के लिए किया जाता है। यह सीधे रक्त प्रवाह में आयरन पहुंचाकर हीमोग्लोबिन के स्तर को तेजी से बढ़ाता है। गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में सुरक्षित और तेजी से खून बढ़ाने के लिए यह एक अत्यधिक प्रभावी उपचार माना जाता है।
बीकानेर, पीबीएम अस्पताल में किडनी संक्रमण से जूझ रही एक और प्रसूता की मंगलवार को मौत हो गई। नापासर निवासी मेघराज की पत्नी कमला को प्रसव पीड़ा होने पर 8 जून की सुबह भर्ती कराया गया था। उसी शाम को उसका सिजेरियन प्रसव किया गया। इसके बाद उसकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। जांच में किडनी संक्रमण सामने आने के बाद 10 जून को उसे मेडिसिन आईसीयू में शिफ्ट किया गया। समय-समय पर डायलिसिस की जा रही थी।
Updated on:
15 Jul 2026 09:09 am
Published on:
15 Jul 2026 09:09 am
