श्री गंगानगर

Video: हिरणों के लिए स्वर्ग बना अमृतादेवी पार्क

जीवप्रेम- एक दशक से कर रहे घायल वन्यजीवों का उपचार, बड़ी संख्या में हिरण, कृष्णमृग एवं वन्यजीवों को मिला अभयदान

3 min read
amrita devi park heaven for deer
amrita devi park heaven for deer

जैतसर. खुले आसमान तले दिनभर स्वतंत्रतापूर्वक अठखेलियां करते बारहसिंगे, उछलते-कूदते कृष्णमृग एवं मूक वन्यजीवों को दाना-पानी डालते हुए वन्यजीवों से प्रेम करने का संदेश देती छोटी-छोटी बच्चियां। इन सबसे अलग यहां का शांत एवं मनोहर पा्रकृतिक दृश्य यहां पहुंचने वाले हर एक जीव प्रेमी को वन्यजीवों के साथ अठखेलियां करने एवं मस्ती में डूब जाने को प्रेरित करते हैं।

यह दृश्य किसी चिडिय़ाघर या जंतुआलय का नहीं बल्कि कस्बे से सटे गांव डाबला में जीव रक्षा बिश्नोई सभा की ओर से गुरू जंभेश्वर मंदिर में संचालित किये जा रहे हिरण पार्क का है। जो अब अब जिलेभर के साथ-साथ प्रदेशस्तर पर अपनी पहचान स्थापित करता दिखायी दे रहा है। पिछले करीब एक दशक से यह क्षेत्र मूक वन्यजीवों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हिंसक जीवों एवं शिकारियों की निगाहों से कहीं दूर एवं उन्मुक्त वातावरण में संचालित इस हिरण पार्क का मनोरम दृश्य देखते ही बनता है।

प्रतिदिन जीव रक्षा बिश्नोई सभा से जुड़े सदस्य एवं पदाधिकारी यहां रह रहे हिरणों, बारहसिंगों व कृष्णमृग को हरा चारा एवं दाना-पानी प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त यहां रह रहे इन वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भी विशिष्ट प्रबंध किये गये हैं। जिससे इन मूक जीवों को यहां स्वतंत्रतापूर्वक विचरण करने में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती।

घायल जीवों का हो रहा नि:शुल्क उपचार एवं देखभाल

बिश्नोई सभा डाबला के प्रधान सीताराम मांझू ने बताया कि डाबला क्षेत्र वन्यजीव प्रेमियों का क्षेत्र होने एवं शिकार निषेध क्षेत्र घोषित होने के कारण यहां पर्याप्त संख्या में वन्यजीव यथा हिरण, बारहसिंगा, खरगोश, कृष्णमृग सहित लुप्त हो रही विभिन्न प्रजातियों के जीव स्वछंद विचरण करते हैं। लेकिन कभी-कभी ये वन्यजीव विशेषकर हिरण, कृष्णमृग एवं बारहसिंगा शिकारियों एवं हिंसक जीवों का शिकार बन घायल हो जाते हैं।

जिन्हें वन्यजीव प्रेमियों की मदद से बिश्नोई मंदिर में लाकर उनका प्राथमिक उपचार एवं देखभाल की जाती है। समय के साथ यहां घायल वन्यजीवों की संख्या बढती जाने के कारण वर्ष २००९ में यहां हिरण पार्क स्थापित करने की योजना बिश्नोई सभा की ओर से की गई। जिसे तत्कालीन बिश्नोई मंदिर समिति ने स्वीकार कर हिरण पार्क प्रारंभ कर दिया। जहां घायल वन्यजीवों का उपचार करने के साथ-साथ उन्हें शिकार निषेध आश्रय भी प्रदान किया गया। वर्तमान में यह पार्क करीब एक सौ से अधिक हिरण, बारहसिंगे एवं कृष्णमृग की शरणस्थली बना हुआ है।

सफेद हिरण बना पार्क का आकर्षण

बिश्नोई सभा प्रधान सीताराम मांझू एवं सचिव ताराचंद धारणियां ने बताया कि बिश्नोई मंदिर में संचालित हिरण पार्क में वन्यजीव प्र्रेमी एक सफेद हिरण के बच्चे को घायल हालत में लेकर पहुंचे। जिसे देखकर समिति से जुड़े सदस्य एवं पदाधिकारी भी आश्चर्यचकित रह गये। सफेद हिरण की यह प्रजाति विलुप्तप्राय हो चुकी है। ऐसे में सफेद हिरण का यह बच्चा अमृतादेवी वन्यजीव संरक्षण पार्क के आकर्षण का केन्द्र बन चुका हैै। जो कि अन्य हिरणों के समूह में अपनी विशिष्ट छवि बनाये हुए है।

जिला कलक्टर ने भी किये पर्यटन क्षेत्र में विकसित करने के प्रयास

गांव डाबला के बिश्नोई मंदिर में संचालित किये जा रहे अमृतादेवी अभ्यारण्य को पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए जिला प्रशासन ने भी पहल की है। जिला कलक्टर कार्यालय की ओर से भी इस पार्क को विकसित एवं संचालित करने के लिए पर्यटन विभाग एवं वन्य जीव संरक्षण बोर्ड से हर संभव मदद करवाने के लिए प्रयास प्रारंभ किये हैं।

हालांकि बजट की कमी के कारण वन्यजीवों की रक्षा एवं पालन-पोषण में समिति सदस्यों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन समाज के प्रबुद्धजनों की आर्थिक सहयोग की परम्परा के चलते यह क्षेत्र वन्यजीवों की शरणस्थली बना हुआ है। यहां करीब एक सौ से अधिक हिरण एवं दर्जनभर बारहसिंगे व एक सफेद हिरण क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

साथ ही बिश्नोई समाज के नागरिकों के वन्य जीवों के प्रति प्रेम को देखते हुए डाबला क्षेत्र को शिकार निषेध क्षेत्र भी घोषित किया हुआ है। वर्तमान में इस अभ्यारण्य पर आने वाले खर्च को बिश्नोई मंदिर समिति एवं सभा से जुड़े आर्थिक समृद्ध सदस्य ही मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

Published on:
15 Mar 2018 05:01 pm