लखनऊ

जज बोले, अतिक्रमण तोडऩे की लापरवाही क्यों, शर्म करो आपकी मनमर्जी नहीं चलेगी

राजस्थान हाईकोर्ट की डबलबैंच के जज गोविन्द माथुर और कैलाशचन्द्र शर्मा ने शहर में अतिक्रमण हटाने की ठप करने और दुबारा कब्जे कराने पर चुप्पी साधने पर जिला प्रशासन को जमकर लताड़ पिलाई।
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Updated: 4 Aug 2016, 1:11 PM IST
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श्रीगंगानगर।

राजस्थान हाईकोर्ट की डबलबैंच के जज गोविन्द माथुर और कैलाशचन्द्र शर्मा ने शहर में अतिक्रमण हटाने की ठप करने और दुबारा कब्जे कराने पर चुप्पी साधने पर जिला प्रशासन को जमकर लताड़ पिलाई। हाईकोर्ट में गुरुवार को अतिक्रमण हटाने के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जजों ने जिला कलक्टर पीसी किशन, एसपी राहुल कोटोकी, नगर परिषद आयुक्त, नगर विकास न्यास सचिव और सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता को आठ अगस्त को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।

हाईकोर्ट में जिला प्रशासन की ओर से सरकारी वकील प्रतिष्ठा दवे पेश हुई और अतिक्रमण हटाने संबंधित कुछ फोटोग्राफ पेश किए तो जजों ने कहा कि जिला प्रशासन को शर्म आनी चाहिए। कोर्ट के निर्णय के बावजूद अतिक्रमण हटाने की बजाय खानापूर्ति की मनमर्जी अब नहीं चलेगी। जिन मार्गो पर कब्जे हटाए, वहां पानी निकासी के इंतजाम क्यों नहीं किए। पूरे शहर में महज चार मार्गो का कब्जा ही तोड़ा है। हर महीने की दस तारीख को हाईकोर्ट के समक्ष जिला प्रशासन से अतिक्रमण हटाने की पालना रिपोर्ट आनी चाहिए थी, लेकिन अब तक महज दो ही रिपोर्ट आई है।

यह न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। आठ अगस्त को कलक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी को पेश करने के आदेश किए गए है। इस कमेटी के खिलाफ अब न्यायालय की अवमानना का प्रकरण शुरू किया जाएगा। इससे पहले याचिकाकर्ता वेदप्रकाश जोशी और उनके वकील संजीत पुरोहित ने शहर में हो रहे कब्जे और तोड़े गए अतिक्रमण स्थलों पर दुबारा निर्माण के संबंध में फोटोग्राफी पेश की।

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