श्री गंगानगर

एमडी ड्रग्स का फैलता जाल, युवाओं पर बढ़ता खतरा

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datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)

-राजस्थान में गुप्त लैब का बढ़ता नेटवर्क, युवा सबसे बड़े निशाने पर


मंगेश कौशिक

श्रीगंगानगर. कम लागत और कई गुना मुनाफे के कारण राजस्थान में सिंथेटिक ड्रग मेफेड्रोन (एमडी) के अवैध निर्माण और तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), राजस्थान पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने प्रदेश के कई जिलों में संचालित गुप्त एमडी लैब का खुलासा किया है। इन मामलों से संकेत मिलते हैं कि राज्य में सिंथेटिक ड्रग्स का नेटवर्क लगातार विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। सुनसान खेतों, फार्म हाउसों और आबादी से दूर स्थानों पर संचालित इन लैब में तैयार होने वाली एमडी की खेप राजस्थान के साथ-साथ अन्य राज्यों तक भी पहुंच रही है।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई में अब तक श्रीगंगानगर, सिरोही, बाड़मेर, जोधपुर और जालोर में अवैध एमडी निर्माण से जुड़ी प्रयोगशालाएं पकड़ी जा चुकी हैं। हाल के मामलों में चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ में भी गुप्त लैब का खुलासा हुआ है। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह भी सामने आया है कि तस्कर एजेंसियों की नजर से बचने के लिए नए ठिकानों पर उत्पादन इकाइयां स्थापित कर रहे हैं।



कई शहरों से जुड़े तार

एमडी तैयार करने के लिए आवश्यक प्रीकर्सर केमिकल और विशेष लैब उपकरण खुले बाजार से आसानी से उपलब्ध नहीं होते। इनकी व्यवस्था औद्योगिक रसायनों की अवैध आपूर्ति या डायवर्जन के जरिए की जाती है। विभिन्न मामलों की जांच में गुजरात के वापी, अंकलेश्वर और अहमदाबाद, महाराष्ट्र के उल्हासनगर तथा दिल्ली सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से रसायन और उपकरण राजस्थान पहुंचने के संकेत मिले हैं।


बनती यहां, बिकती बाहर

जांच एजेंसियों के अनुसार विभिन्न मामलों में राजस्थान में तैयार एमडी की सप्लाई गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना सहित कई राज्यों तक होने के प्रमाण मिले हैं। अलग-अलग गिरोहों के नेटवर्क के अनुसार अन्य राज्यों से भी संबंध सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सिंथेटिक ड्रग्स का यह नेटवर्क लगातार अपना स्वरूप बदलता रहता है, जिससे इसकी निगरानी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

प्रदेश में कहां अधिक मामले

कार्रवाई और बरामदगी के पैटर्न के आधार पर जांच एजेंसियों का आकलन है कि जयपुर, जोधपुर, श्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़ और बाड़मेर जैसे शहरी एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में एमडी से जुड़े मामले अपेक्षाकृत अधिक सामने आए हैं। सीमावर्ती जिलों में पहले से सक्रिय तस्करी नेटवर्क का इस्तेमाल सिंथेटिक ड्रग्स की आवाजाही में भी किए जाने की आशंका जताई गई है।

कम लागत, कई गुना मुनाफा

एक किलोग्राम एमडी तैयार करने में लगभग 5 से 7 लाख रुपए का खर्च आता है। जब यही ड्रग छोटे पेडलर्स के माध्यम से पब, रेव पार्टियों और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचती है तो इसकी कीमत 1.5 करोड़ से 2 करोड़ रुपए प्रति किलोग्राम या उससे अधिक हो जाती है। भारी मुनाफे के कारण अपराधी सुनसान खेतों, ढाणियों और फार्म हाउस में गुप्त लैब स्थापित कर रहे हैं, ताकि लंबे समय तक एजेंसियों की नजर से बचे रह सकें।


एमडी ड्रग: फैक्ट फाइल

-कार्रवाई में उजागर उत्पादन वाले जिले: श्रीगंगानगर, सिरोही, बाड़मेर, जोधपुर, जालोर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़।


-कच्चा माल कहां से: गुजरात (वापी, अंकलेश्वर, अहमदाबाद), महाराष्ट्र (उल्हासनगर), दिल्ली सहित अन्य औद्योगिक नेटवर्क।

-सप्लाई किन राज्यों में: गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना सहित अन्य राज्यों तक।

-राजस्थान में खपत: जयपुर, जोधपुर, श्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़, बाड़मेर।



इनका कहना है

सिंथेटिक ड्रग्स का अवैध कारोबार पारंपरिक अफीम, डोडा या गांजा तस्करी से अलग है। इसमें खेती की जरूरत नहीं होती। केवल रसायन, उपकरण और प्रशिक्षित लोग मिल जाएं तो कहीं भी अस्थायी लैब स्थापित की जा सकती है। यही कारण है कि जांच एजेंसियां अब केवल तस्करों पर ही नहीं, बल्कि प्रीकर्सर केमिकल की आपूर्ति, परिवहन और अवैध नेटवर्क पर भी लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

- घनश्याम सोनी, जोनल डायरेक्टर, एनसीबी, जोधपुर

Updated on:
03 Aug 2026 06:00 am
Published on:
03 Aug 2026 06:00 am
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