सुकमा

Maoist Funding: स्विट्जरलैंड से नक्सलियों तक पहुंचा सोना, पूर्व विधायक मनीष कुंजाम का बड़ा दावा

Apr 04, 2026
स्विट्जरलैंड से नक्सलियों तक पहुंचा सोना (photo source- Patrika)
स्विट्जरलैंड से नक्सलियों तक पहुंचा सोना (photo source- Patrika)

Maoist Funding: Sukma जिले के कोंटा क्षेत्र से पूर्व विधायक और आदिवासी नेता Manish Kunjam ने नक्सल गतिविधियों और उनके आर्थिक नेटवर्क को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में नक्सलियों के पास से बरामद सोने का स्रोत देश के भीतर नहीं, बल्कि विदेश से जुड़ा हो सकता है, यहां तक कि यह सोना Switzerland के बैंकों से आया हो सकता है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

Maoist Funding: ऐसे हुआ पैसों का लेन-देन

दंतेवाड़ा स्थित सर्किट हाउस में मीडिया से चर्चा के दौरान कुंजाम ने कहा कि नक्सली वर्षों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के नाम पर आंदोलन करते रहे, लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य कुछ और ही था। उनके अनुसार, ये संगठन आदिवासी हितों की रक्षा के बजाय सत्ता हासिल करने की विचारधारा से प्रेरित थे और उन्होंने स्थानीय संसाधनों के संरक्षण के नाम पर लोगों को भ्रमित किया।

उन्होंने खनन गतिविधियों को लेकर भी कई सवाल उठाए। कुंजाम ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में कई स्थानों पर खदानों के विरोध में ग्रामीणों ने लंबे समय तक आंदोलन किए। इसके बावजूद Aamdai mines और Rowghat जैसी परियोजनाएं शुरू हो गईं। उनका आरोप है कि इन खदानों को शुरू कराने के पीछे नक्सलियों और कुछ एजेंट्स के बीच पैसों का लेन-देन हुआ। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग माध्यमों से करोड़ों रुपए नक्सलियों तक पहुंचाए जाते थे और पैसे मिलने के बाद ही खनन कार्यों को अनुमति या मौन सहमति मिलती थी।

कुंजाम ने यह भी कहा कि जब समय पर नक्सलियों तक पैसा नहीं पहुंचता था, तब वे हिंसक घटनाओं को अंजाम देते थे, जिससे दबाव बनाया जा सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े प्रमाण हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक किया जा सकता है।

Maoist Funding: स्रोत को लेकर कई नए सवाल खड़े हुए…

हाल ही में Bijapur जिले में 31 मार्च को 25 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिनके पास से 7 किलोग्राम से अधिक सोना बरामद किया गया, जिसकी कीमत लगभग 11 करोड़ रुपए आंकी गई। इससे पहले Jagdalpur में भी आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पास से करीब डेढ़ किलोग्राम सोना बरामद किया गया था। इन घटनाओं ने नक्सलियों के फंडिंग नेटवर्क और संसाधनों के स्रोत को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

कुल मिलाकर, यह मामला केवल सुरक्षा या कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की संभावनाओं से भी जुड़ा हुआ नजर आ रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इन दावों की निष्पक्ष और गहन जांच होती है, तो नक्सल फंडिंग के पीछे छिपे तंत्र का खुलासा हो सकता है, जो लंबे समय से देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे के लिए चुनौती बना हुआ है।

Updated on:
04 Apr 2026 02:59 pm
Published on:
04 Apr 2026 02:59 pm