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दशकों बाद लौटी परंपरा… अब नक्सलियों को नहीं, देवताओं को चढ़ता है फसल का पहला पहला अंश

Sukma: बस्तर में नक्सलियों के आर्थिक नेटवर्क के कमजोर होने से आदिवासियों को ‘लाल टैक्स’ से राहत मिली है। पहले जहां मवेशी और जमीन के आधार पर वसूली होती थी, अब ग्रामीण अपनी कमाई का उपयोग खुद के विकास में कर पा रहे हैं।

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लाल आतंक का 'आर्थिक सूर्यास्त' (photo source- Patrika)

लाल आतंक का 'आर्थिक सूर्यास्त' (photo source- Patrika)

देवेंद्र गोस्वामी/छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के जगरगुंडा में जब किसान के घर धान की नई फसल आती है, तो परंपरा के अनुसार पहला अंश देवी-देवताओं के लिए निकाला जाता है। लेकिन सुकमा के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दशकों तक यह परंपरा खौफ के साये में बदली हुई थी। यहां ग्रामीण अपनी फसल का पहला हिस्सा भगवान के लिए नहीं, बल्कि नक्सलियों के 'पीएलजीए' कैडर्स के लिए अलग रखते थे।

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