CG News: छात्रा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोंटा में भर्ती कराया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल सुकमा रेफर कर दिया।
CG News: सुकमा जिले में संचालित एक आवासीय विद्यालय की नाबालिग छात्रा के गर्भवती होने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हडक़ंप मच गया है। तबीयत बिगडऩे और तेज रक्तस्राव की शिकायत के बाद 9 मार्च को छात्रा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोंटा में भर्ती कराया गया था।
प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल सुकमा रेफर कर दिया। सूत्रों के अनुसार छात्रा गर्भवती थी और आशंका जताई जा रही है कि उसे गर्भपात की दवा दी गई थी। हालांकि यह दवा छात्रा को आश्रम परिसर में दी गई या उसने कहीं और से ली, यह अभी जांच का विषय बना हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग और पुलिस दोनों स्तर पर मामले की जांच की जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार मामले में एमएलसी की प्रक्रिया भी पूरी की गई है। छात्रा का एमएलसी जिला अस्पताल सुकमा में किया गया, जबकि संबंधित युवक का मेडिकल परीक्षण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक छात्रा की तबीयत बिगडऩे के कारणों को लेकर जांच जारी है। चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था या अन्य चिकित्सकीय स्थिति की पुष्टि जिला अस्पताल में की गई विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
घटना सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आवासीय विद्यालय में रहने वाली छात्रा की गर्भावस्था की जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिल सकी। यदि छात्रा को गर्भपात की दवा दी गई है तो यह भी जांच का विषय है कि दवा किसने और कहां से दी। इस कारण आश्रम प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार छात्रा के साथ संबंध बनाने वाला युवक घटना के समय नाबालिग था, लेकिन अब वह बालिग हो चुका है और हाल ही में उसने 18 वर्ष की आयु पूरी की है। इस मामले में आरोपी युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आवासीय विद्यालय में रह रही छात्रा की स्थिति की जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिल सकी। यदि गर्भपात की दवा दी गई है, तो यह भी जांच का विषय है कि दवा किसने और किन परिस्थितियों में उपलब्ध कराई। इसी वजह से आश्रम प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।