सुरजपुर

बारिश में मच्छरों ने जीना किया मुहाल, दवा का छिड़काव बंद होने से सता रहा डेंगू-मलेरिया का डर

सुबह-शाम कॉलोनी सहित हर इलाके में मच्छरों का है प्रकोप, एसईसीएल व नगरपालिका ने अपना रखा है लापरवाह रवैय्या
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Updated: 4 Aug 2018, 11:24 AM IST
Mosquitoes
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बिश्रामपुर. नगर पंचायत व एसईसीएल क्षेत्र के अंतर्गत रहने वाले लोग लगातार बारिश से परेशान तो हैं ही, साथ ही पूरे क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप है। इससे डेंगू एवं मलेरिया जैसे कई खतरनाक बीमारियों का भय लोगों को सता रहा है।


उल्लेखनीय है कि बिश्रामपुर क्षेत्र वैसे तो कॉलरी क्षेत्र के नाम से मशहूर है परंतु एसईसीएल के अलावा यहां नगर पंचायत भी अपनी उपस्थिति रखती है। कहा जाए तो एक क्षेत्र में दो-दो एजेंसी काम कर रही हंै इसके बावजूद बरसात के मौसम में मच्छरों से निजात दिलाने दवा तक का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। शाम ढलते ही लोगों की परेशानी बढ़ जाती है।

उन्हें हर पल डेंगू व मलेरिया जैसे कई खतरनाक बीमारियों का भय सता रहा है। एसईसीएल व नगर पंचायत की लापरवाही का खामियाजा क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ रहा है। एसईसीएल व नगर पंचायत का इस गंभीर समस्या से कोई लेना-देना नहीं है।


वर्षों से बंद है दवा का छिड़काव
कई वर्ष पूर्व एसईसीएल प्रबंधन द्वारा सम्पूर्ण क्षेत्र में अपने कर्मचारियों की सेहत का ख्याल रखते हुए मच्छरों के प्रकोप से बचाने लगातार दवा का छिड़काव किया जाता था। उस समय हालात काबू में रहते थे, लेकिन अब ये व्यवस्था व बात पुरानी हो गई है। अब तो आलम यह है कि विगत कई वर्षों से दवा का छिडकाव एसईसीएल ने पूर्णत: बंद कर दिया है।

वहीं नगर पंचायत द्वारा भी बीच में दवा का छिड़काव किया जाता था पंरतु अब वह भी पूर्णत बंद हो चुका है जिससे लोगो की परेशानियां बढ़ गईं हैं।


सफाई केवल नगर पंचायत के भरोसे
क्षेत्र में यदि नजर डालें तो एसइसीएल ने दवा छिड़काव के साथ ही सफाई भी पूर्णत: बंद कर दी है। अब एसईसीएल के ठेकेदार कहीं भी सफाई करवाते नजर नहीं आते। शायद एसईसीएल की सफाई सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह गई है।

क्षेत्र में केवल नगर पंचायत ही साफ-सफाई करते नजर आता है। इतने बड़े क्षेत्र में केवल एक एजेंसी के भरोसे ही साफ-सफाई निर्भर हो चूकी है। नियमित साफ-सफाई न होने से भी मच्छरों के प्रकोप में तेजी से इजाफा हो रहा है जो चिंता का विषय है।


श्रमिक संगठनों को भी नहीं कोई सरोकार
क्षेत्र में वैसे तो 5 श्रमिक संगठन संचालित हंै, जो एसईसीएल को अपने जरूरत के हिसाब से चलाने की जुगत में लगे रहते हैं, लेकिन जनमानस से जुड़ी इस समस्या से उन्हें भी कोई लेना-देना नहीं है।


पता करवाता हूं
मैं पता करवाता हूं कि क्यों दवा का छिड़काव बंद पड़ा है। इस मामले में देखते हंै क्या हो सकता है।
घनश्याम सिंह, महाप्रबंधक, बिश्रामपुर


तत्काल कराया जाएगा निराकरण
मैं इस मामले को जल्द दिखवाती हूं, तत्काल इस समस्या का निराकरण किया जाएगा।
यूफ्रिसिया एक्का, सीएमओ, नपा

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