सुरजपुर

छत्तीसगढ़ के इस अभ्यारण्य में ऑफिसर ही कर रहे थे गलत काम, हाईकोर्ट ने पीसीसीएफ को दिए ये आदेश

मामले में हाईकोर्ट ने दिखाई गम्भीरता, याचिकाकर्ता व ग्रामीणों से करनी होगी चर्चा, पूर्व में शिकायत के बाद भी नहीं हुई थी कार्रवाई
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Tree cutting
Trees cutting

प्रतापपुर. हाईकोर्ट बिलासपुर ने तमोर पिंगला अभ्यारण्य में पेड़ों की कटाई के मामले को गंभीरता से लेते हुए पीसीसीएफ छत्तीसगढ़ को स्वयं निरीक्षण करने और याचिकाकर्ता और ग्रामीणों से चर्चा उपरांत 14 नवंबर से पूर्व रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

कुछ महीने पूर्व यहां रेस्क्यू सेंटर निर्माण के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और कार्यालय परिसर में आरा लगा चिराई करने का मामला सामने आया था। इसमें कई शिकायतों के बाद जांच कार्रवाई नहीं हुई थी, जिसके बाद प्रतापपुर के कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।


गौरतलब है कि वाइल्ड लाइफ सरगुजा द्वारा तमोर पिंगला अभ्यारण्य और सूरजपुर वनमण्डल के घुई रेंज में करोड़ों की लागत से रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है और इसका निर्माण वाइल्ड लाइफ के साथ उप निदेशक एलिफैंट रिजर्व सरगुजा और तमोर पिंगला अभ्यारण्य की देख रेख में हो रहा है।

निर्माण क्षेत्र तमोर पिंगला और घुई में अधिकारियों के निर्देश पर कर्मचारियों द्वारा नियमों को ताक में रख बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया था जबकि अभ्यारण्य क्षेत्र में किसी भी स्थिति में पेड़ों की कटाई नहीं की जा सकती।

काटने की तो बात दूर वहां स्वत: गिरे हुए पेड़ों को उठाने की अनुमति नहीं होती क्योंकि इनमें छोटे जीव-जंतु पैदा होते हैं जो वन्य प्राणियों के काम आते हैं। बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने के साथ अधिकारियों ने तमोर पिंगला कार्यालय रमकोला में आरा और मजदूर लगा बेधड़क इनकी चिराई करा पटरा और चौखट बनवाया था ताकि इन्हें बाहर बेच सकें।

उक्त मामले सामने आने के बाद अभ्यारण्य क्षेत्र में विभागीय संलिप्तता से लकड़ी तस्करी की बातें भी सामने आईं थीं। मामला खुलने के बाद विभाग में हड़कम्प मच गया था क्योंकि दूरस्थ होने का फायदा उठा विभागीय लोग अब तक बिना किसी रोक-टोक के तस्करी में लगे हुए थे। इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद कार्रवाई हो जानी थी किन्तु कार्यवाही की बजाए विभाग मामले को दबाने में लग गया था।


इन्होंने लगाई है याचिका
शासन-प्रशासन द्वारा इस गम्भीर मामले में कोई कार्रवाई न होने के बाद मामले में पूर्व में शिकायत करने वाले चन्द्रिका कुशवाहा, कंवल साय और आरटीआई कार्यकर्ता राकेश मित्तल ने अधिवक्ता रजनी सोरेन के माध्यम से हाइकोर्ट बिलासपुर में याचिका दायर की थी। इसमें अंधाधुंध लकड़ी कटाई के मामले में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी।

प्रस्तुत याचिका मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी और न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा ने स्वीकार करते हुए मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ सरगुजा और उप निदेशक एलिफेंट रिजर्व सरगुजा को नोटिस भेजते हुए दो हफ्ते में जवाब प्रस्तुत करने कहा था।

इसके बाद विभाग के अधिकारियों ने अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया था। अब मामले में हाईकोर्ट का नया आदेश सामने आया है। हाईकोर्ट ने वन विभाग के प्रमुख पीसीसीएफ को स्वयं जाकर निरीक्षण करने का आदेश दिया है।


ग्रामीणों ने किया था चक्काजाम
मामले में स्थानीय ग्रामीणों ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर रमकोला में चक्कजाम और कार्यालय का घेराव किया था जिसके बाद कलक्टर के निर्देश पर प्रतापपुर नायब तहसीलदार पड़वार ने मामले की जांच की और आरोपों को सही बताते हुए एसडीएम को प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया था लेकिन जांच के बाद प्रतिवेदन में कोई कार्रवाई नहीं हुई।


कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से पीसीसीएफ को दिए हैं निर्देश
मामले की गुरुवार को सीजे की डबल बैंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने पीसीसीएफ को व्यक्तिगत रूप से तमोर पिंगला वन का निरीक्षण करने का निर्देश देते हुए पेड़ों की कटाई पर याचिकाकर्ता व ग्रामीणों से जानकारी लेने तथा 14 नवंबर से पहले रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 नवंबर का दिन निर्धारित किया है।
रजनी सोरेन, अधिवक्ता, हाईकोर्ट बिलासपुर

Updated on:
28 Oct 2018 04:37 pm
Published on:
28 Oct 2018 04:37 pm
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