सेफ होम, सेफ स्ट्रीट प्रोजेक्ट : हर थाने में दो सदस्यीय चाइल्ड वेलफेयर टीम
सूरत. छोटी बच्चियों को अपराध का शिकार होने से बचाने के लिए शहर पुलिस की ओर से शुरू किए गए सेफ होम, सेफ स्ट्रीट प्रोजेक्ट के तहत दो महीने में शहर के विभिन्न थाना क्षेत्र में लापता 20 बच्चों को पुलिस ने परिवार तक पहुंचाया।
दो दिन पहले उधना क्षेत्र में तीन साल की एक बच्ची खेलते-खेलते घर के पास से लापता हो गई थी। लोगों ने बच्ची को रोते देखा तो उसे उधना थाने पहुंचाया। उधना पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर की टीम ने इस बच्ची के मां-बाप तक पहुंचने के लिए उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल की। आखिर पोस्ट बच्ची के पिता के मोबाइल तक पहुंच गई और बच्ची का उसके परिवार से मिलन हो गया। दो महीने से सूरत शहर पुलिस के विभिन्न थानों में तैनात चाइल्ड वेलफेयर की टीम इसी तरह कार्य कर रही है और लापता बच्चों को उनके परिवार तक पहुंचा रही है। डिंडोली और लिंबायत थाना क्षेत्र में तीन मासूम बच्चियों का अपहरण कर बलात्कार की घटना सामने आने के बाद लोगों में पुलिस के प्रति आक्रोश देखने को मिला था। पुलिस आयुक्त ने इसे गंभीरता से लिया और बच्चों की सुरक्षा के लिए सेफ होम, सेफ स्ट्रीट प्रोजेक्ट की शुरुआत की। पुलिस के मुताबिक सेफ होम, सेफ स्ट्रीट प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद अब तक 20 बच्चों को पुलिस उनके मां-बाप तक पहुंचा चुकी है। इनमें सबसे अधिक 8 बच्चे लिंबायत और 7 ंिडंडोली के थे। पांडेसरा क्षेत्र में दो बच्चों को उनके घर पहुंचाया गया।
सुबह-शाम गश्त पर निकलती है टीम
थानों में तैनात चाइल्ड वेलफेयर की दो सदस्यीय टीम रोजाना सुबह और शाम को दो-दो घंटे थाना क्षेत्र में गश्त पर निकलती है। गश्त के दौरान कोई बच्चा या बच्ची सड़क पर अकेले घूमते पाया जाता है तो उससे पूछताछ की जाती है। यदि बच्चे कुछ नहीं बता पाते तो आसपास के लोगों से पूछताछ की जाती है। लोग यदि बच्चों को पहचान लेते हैं तो उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाया जाता है। पहचान नहीं होने पर उन्हें थाने ले जाया जाता है और उनके मां-बाप की खोज की जाती है।