जन्म के बाद सभी नवजात बच्चों को मां का दूध मिले, इस उद्देश्य से मनपा ने दस साल पहले यशोदा प्रोजेक्ट के तहत ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू किया...
सूरत।जन्म के बाद सभी नवजात बच्चों को मां का दूध मिले, इस उद्देश्य से मनपा ने दस साल पहले यशोदा प्रोजेक्ट के तहत ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू किया गया था। इस बैंक में अब तक 5200 महिलाओं ने दूध दान किया और करीब ४३८ लीटर दूध जमा किया गया। करीब सैंतीस सौ नवजात बच्चों को इस बैंक से दूध दिया गया। शहर में १७५० माताओं ने स्वैच्छिक दूध दान शिविर में हिस्सा लेकर ७९ लीटर दूध दान किया। विश्वभर में बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार तथा स्तनपान को प्रोत्साहित करने के लिए अगस्त के प्रथम सप्ताह को स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है।
महानगर पालिका की पूर्व आयुक्त एस. अपर्णा ने २००८ में सभी नवजात बच्चों को दूध मुहैया कराने के लिए सूरत पिड्याट्रिक एसोसिएशन के साथ यशोदा प्रोजेक्ट के तहत स्मीमेर अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक की शुरूआत की थी। ११ दिसम्बर, २००८ को उद्घाटन के बाद से अब तक दस साल में इस मिल्क बैंक से करीब तीन हजार सात सौ नवजात बच्चों की दूध की जरूरत पूरी की गई।
प्रशासन ने बताया कि मिल्क बैंक में पांच हजार दो सौ माताओं ने दूध का दान किया, जिससे करीब ४३८ लीटर दूध जमा किया गया। इसके अलावा शहर में आयोजित अलग-अलग दूध दान शिविरों में करीब एक हजार सात सौ पचास माताओं ने दूध का दान किया, जिससे करीब ७९ लीटर दूध जमा हुआ।
सूरत पिड्याट्रिक एसोसिएशन के प्रमुख प्रशांत कारिया ने बताया कि परम डॉक्टर हाउस में अर्थव क्लीनिक पर गर्भवती महिलाओं के लिए स्तनपान के महत्व पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसके अलावा न्यू सिविल तथा स्मीमेर अस्पताल में स्तनपान सप्ताह के दौरान स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां आम लोगों को मां के दूध का महत्व समझाया जाएगा। एसवीएनआइटी, नवयुग, के.पी. कॉमर्स, सासमा कॉमर्स, ए.जेड. शाह कॉमर्स, पी.टी. साइंस, पी. टी. महिला आर्ट्स, वीटी पोद्दार कॉलेज में स्तनपान सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
माइनस 20 डिग्री पर होता है संग्रह
मां से दूध संग्रह करने के बाद उसे पॉश्चूराइज्ड कर डीफ्रीज में -20 डिग्री पर रखा जाता है। दूध दान के पहले मां के रक्त की जांच की जाती है। दूध दान करने वाली मां और बच्चा तंदरुस्त हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। अधूरे माह में जन्मे बच्चों के लिए यह दूध बहुत उपयोगी साबित होता है। फिलहाल मिल्क बैंक में दो सौ लीटर दूध संग्रह की व्यवस्था है।
सूरत का नाम लिम्का बुक में
शहर में माताओं के लिए स्वैच्छिक दूध दान शिविर आयोजित करने के लिए सूरत पिड्याट्रिक एसोसिएशन ने विभिन्न महिला सामाजिक संगठनों से सम्पर्क किया। देश में मिल्क डोनेशन कैम्प की शुरूआत सूरत से हुई, जिसके कारण सूरत का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ है। मोढवणिक महिला मंडल, उमिया महिला मंडल, रणकपुर जैन महिला मंडल, ज्वॉइंट्स क्लब महिला तथा सूरत चैम्बर ऑफ कॉमर्स की महिला विंग ने शिविर के लिए सहयोग किया।
स्तनपान का लाभ
चिकित्सकों ने बताया कि मां के दूध में प्रोटीन, वसा, कैलोरी, लैक्टोज, विटामिन, लोहा, खनिज, पानी और एंजाइम समेत सभी पोषक तत्व मौजूद रहते है। यह दूध बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और संक्रमण से बचाता है। दूध पचने में त्वरित और आसान होता है। इससे मां और बच्चे के बीच भावनात्मक बंधन मजबूत होता है।