सूरत में चूना बनाने वाली कंपनी के नाम का उपयोग कर नकली चूना बनाने वाले बोटाद के व्यापारी पिता-पुत्र के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज...
सूरत।सूरत में चूना बनाने वाली कंपनी के नाम का उपयोग कर नकली चूना बनाने वाले बोटाद के व्यापारी पिता-पुत्र के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।सिद्धार्थ चूना कंपनी के संचालक विक्रमभाई ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स में बताया कि उनकी कंपनी गुजरात, महाराष्ट्र तथा मध्यप्रदेश में चूना बेचती है। कुछ दिनों से उनके ब्रांड की डुप्लीकेशन की शिकायतें मिल रही थीं।
जांच करने पर कुछ लोगों के नाम सामने आए। इस बारे में पुलिस में शिकायत की गई। पुलिस ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए बोटाद में मार्बल का पावडर और कलर मिलाकर नकली चूना बनाने वाले पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर 21.62 लाख रुपए की सामग्री जब्त की।
लावारिस पशुओं को पकडऩा मनपा को पडऩे लगा भारी
शहर में सडक़ों पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकडऩा मनपा प्रशासन को भारी पडऩे लगा है। पांजरापोल के पशुओं को लेने से मना करने के बाद मनपा टीम वैकल्पिक उपाय तलाश रही है। उधर, रख-रखाव के अभाव में पशुओं की मौत से जीव दया प्रेेमियों में नाराजगी है।
मनपा का मार्केट विभाग शहर में सडक़ों पर घूम रहे लावारिस पशुओं को पकडक़र भेस्तान में बने ढोर डब्बा में रखता है। इस बीच, जिन लोगों के पशुओं को पकड़ा गया है, वह पेनल्टी चुकाकर पशुओं को छुड़ा ले जाते हैं। जिन पशुओं को नहीं छुड़ाया जाता, उन्हें पांजरापोल भेज दिया जाता था। वर्ष २०१५ से अब तक मनपा प्रशासन ने रास्ते से पकड़े गए ६९८४ पशुओं को पांजरापोल भेजा है। जगह न होने के कारण पांजरापोल प्रशासन ने अब पशुओं को लेना बंद कर दिया है, जिससे उन्हें ढोर डब्बा में ही रखा जा रहा है।
ढोर डब्बा में अव्यवस्थाओं के कारण शुक्रवार को तीन पशुओं की मौत का मामला सामने आया। उपमहापौर नीरव शाह और मार्केट विभाग के डॉ. प्रफुल्ल मेहता शुक्रवार को मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। शाह ने बताया कि सूरत पांजरापोल के मना करने के बाद इन पशुओं को अब करजण के पांजरापोल में शिफ्ट किया जाएगा। करजण पांजरापोल प्रशासन से इस संबंध में बात हो चुकी है। जानकारों की मानें तो करजण पांजरापोल में भी क्षमता से अधिक पशुओं के होने के कारण वहां का प्रशासन भी अतिरिक्त पशुओं को लेने की हालत में नहीं है। ऐसे में मनपा प्रशासन के समक्ष दुविधा है।
नीरव शाह ने कहा कि यदि ऐसी हालत बनती है कि पशुओं को कहीं भी शिफ्ट नहीं किया जा सकता तो मनपा प्रशासन को पशुओं को पकडऩे का अभियान कुछ दिन के लिए बंद करना पड़ेगा। यदि पशुओं को पकडऩा बंद करते हैं तो वैकल्पिक व्यवस्था होने के बाद ही अभियान शुरू करेंगे।