मनपा बजट 2018-19- पार्षद बोले तय हो शहर की खेल नीति, जल्द बने महिला बाजार
सूरत. मनपा बजट 2018-19 पर चर्चा के दौरान पार्षद असलम साइकिलवाला ने टैक्स स्ट्रक्चर में रिफार्म की बात करते हुए सिटी सर्विस टैक्स का मुद्दा उठाया। शहर में महिलाओं के लिए महिला बाजार के प्रस्ताव पर आयुक्त का आभार जताते हुए उन्होंने शहर के लिए खेल नीति भी तय करने की जरूरत बताई। ध्यान रहे पत्रिका ने सिलसिलेवार तीनों मुद्दे प्रमुखता से उठाए थे।
बजट प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान बोलते हुए कांग्रेस पार्षद ने मनपा को वित्तीय घाटे से उबारने के लिए टैक्स स्ट्रक्चर में रिफार्म की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जिस तरह से राजस्व घाटे को पाटने के लिए मनपा प्रशासन कर दर में वृद्धि को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल करता है, उसे बदले जाने की जरूरत है। केंद्र व राज्य सरकार के साथ संवाद कर सिटी सर्विस टैक्स को सीधे जीएसटी से जोड़ दिया जाए तो कारोबारी नगरी सूरत को अप्रत्याशित लाभ होगा। इस टैक्स से मनपा की चुंगी बंद होने से हुए नुकसान की भरपाई भी हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह के इनोवेटिव विकल्पों पर विचार किया गया होता तो मनपा आयुक्त एम थेन्नारसन को कर दर में बेतहाशा वृद्धि का विकल्प नहीं चुनना पड़ता। गौरतलब है कि प्रोफेशनल टैक्स इसका बेहतरीन उदाहरण है। जबतक राज्य सरकार प्रोफेशनल टैक्स की वसूली करती थी, इसे वसूलने पर हो रहे खर्च की भरपाई भी नहीं हो रही थी। जब इसकी वसूली मनपा को सौंपी गई तो आंकड़ा सौ करोड़ पार कर गया। राज्य सरकार इसकी वसूली का आंकड़ा कभी पांच करोड़ भी पार नहीं कर पाई।
इसके अलावा बजट में महिलाओं के लिए महिला संचालित बाजार के प्रस्ताव को शामिल करने पर कांग्रेस पार्षद ने मनपा प्रशासन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इससे महिला सशक्तीकरण के अभियान को बल मिलेगा। उन्होंने सदन में मौजूद महिला पार्षदों से भी इस काम को तेजी से पूरा कराने में सहयोग की मांग की। संसाधनों पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी शहर से खेल प्रतिभाओं के सामने नहीं आने पर अफसोस जताते हुए कांग्रेस पार्षद ने कहा कि मनपा प्रशासन को खेल को लेकर शहर के लिए नीति तय करनी चाहिए। केवल इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराकर अपनी जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि हरियाणा जैसे छोटे प्रदेश से बड़े खिलाड़ी निकलते हैं। हम बेहतर संसाधन मुहैया कराने के बाद भी इस क्षेत्र में पिछड़ रहे हैं। यदि खेलों के लिए मनपा प्रशासन पॉलिसी तय करे तो भविष्य में सूरत से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।
पत्रिका ने उठाए थे मुद्दे
महिला बाजार, खेल नीति और सिटी सर्विस टैक्स के विकल्प को लेकर समय-समय पर समाचार प्रकाशित किए थे। राजस्थान पत्रिका ने 23 दिसंबर के अंक में 'विकास की शर्त है जेंडर बजट' शीर्षक से टिप्पणी प्रकाशित की थी। जिसके बाद शहर की महिलाओं ने बजट में अपने हिस्से के लिए माहौल बनाना शुरू किया। महिलाओं की इस मुहिम को पत्रिका ने आवाज दी और एक ऐसे बाजार का खाका सामने रखा जिसमें महिला बाजार पूरी तरह महिला संचालित हो, जहां पार्किंग और गाड्र्स भी महिला ही हों। शहर की महिलाओं के लिए महिला संचालित बाजार की मांग के समर्थन में पत्रिका ने दो जनवरी के अंक में 'महिलाओं को चाहिए अपना बाजार, जहां सब उनके हाथ में हो' शीर्षक से खबर प्रकाशित की। पत्रिका की इस मुहिम को भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की महिला पार्षदों ने समर्थन दिया। खबर प्रकाशित होने के बाद कांग्रेस पार्षद असलम साइकिलवाला ने महिला जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया कि वे मांग का समर्थन करें। पत्रिका ने 13 जनवरी के अंक में 'महिला जनप्रतिनिधियों से मांगा समर्थन' शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर महिलाओं के पक्ष में शुरू हुई इस मुहिम को स्वर दिया। मनपा बोर्ड की 29 जनवरी को हुई सामान्य सभा में भी कांग्रेस पार्षद डॉ. चारुल कसवाला ने यह मुद्दा उठाते हुए बजट में प्रावधान की मांग की थी। जिसके बाद 30 जनवरी को आयुक्त ने महिला बाजार की मांग को ड्राफ्ट बजट का हिस्सा बनाया था।
23 दिसंबर को प्रकाशिता टिप्पपणी में ही पत्रिका ने खेल नीति की जरूरत बताते हुए कहा था कि मनपा के हजारों करोड़ रुपए के बजट में खेल गतिविधियणें की लगातार उपेक्षा हो रही है। खेल प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान की जरूरत बताते हुए पत्रिका ने सलाह दी थी कि मनपा को अपनी खेल नीति बनानी चाहिए। यूं भी मनपा प्रशासन इन दिनों पॉलिसी मोड में है और स्पोट्र्स पॉलिसी तैयार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।
एक फरवरी को 'ड्राफ्ट बजट में खोजने थे आय के दूसरे स्रोत' शीर्षक से प्रकाशित टिप्पणी मेें पत्रिका ने सिटी सर्विस टैक्स का फार्मूला सामने रखा था। इसमें बताया था कि राजस्व बढ़ाने के लिए आयुक्त के पास दो विकल्प थे- या तो कर की दर बढ़ा दो या फिर कुछ ऐसा नया करो जिससे आम सूरती को प्रत्यक्ष कर के बोझ तले दबने से बचाया जा सके। इसके लिए पूरी क्षमता के साथ मनपा की आय बढ़ाने के उपायों पर कवायद करनी पड़ती। कर दर में वृद्धि ज्यादा आसान रास्ता था और मनपा प्रशासन इसी रास्ते पर आगे बढ़ा। पत्रिका ने सुझाया था कि यदि सिटी सर्विस टैक्स के नाम से नया कर शुरू कर जीएसटी से लिंक कराया जा सकता था। कारोबारी नगरी में जिस बिल पर जीएसटी लगता उसमें एक फीसदी सिटी सर्विस टैक्स भी जुड़ जाता जो सीधे मनपा के खाते में जमा होता। यदि ऐसा होता तो मनपा प्रशासन ही नहीं केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के लिए भी राजस्व बढ़ाना आसान हो जाता। बजट चर्चा के दौरान असलम साइकिलवाला ने इन तीनों मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया।