सुजलाम सुफलाम अभियान का पूरा फोकस तापी की सफाई और जल संचय पर
सूरत. राज्य सरकार की पहल पर मनपा प्रशासन के सुजलाम सुफलाम अभियान के बीच शहर की खाडिय़ां कचरे से अटी पड़ी हैं। आसपास के लोग बदबू से परेशान हैं। लोगों का मानना है कि हालत यही रही तो किनारे रह रहे लोग मानसून के दौरान संक्रामक रोगों की चपेट में आ जाएंगे।
मानसून से पहले मनपा प्रशासन हर बार प्री मानसून काम कराता रहा है। इसके तहत तापी किनारों और खाडिय़ों की सफाई के साथ ही स्टोर्म ड्रेनेज लाइनों की सफाई कराई जाती है। इस बार राज्य सरकार की पहल पर प्रदेशभर में सुजलाम सुफलाम अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें प्री मानसून कामों के साथ ही जल संचय को भी जोड़ दिया गया है। सूरत मनपा के अधिकारियों का पूरा फोकस तापी की सफाई और जल संचय पर रह गया। इस कारण खाडिय़ों की साफ-सफाई के काम पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। यही वजह है कि शहर की खाडिय़ां कचरे से अटी पड़ी हैं।
इन खाडिय़ों के किनारे और आसपास रह रहे लोग बदबू से परेशान हैं। उनका आरोप है कि प्री मानसून कामों में जिस तरह की लापरवाही बरती जा रही है, उसका खामियाजा उन्हें मानसून के दौरान भुगतना पड़ सकता है। बारिश के बीच खाडिय़ों में जमा गंदगी आसपास के इलाके में संक्रामक रोगों की वजह बन गई तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।
डाउन स्ट्रीम में गिर रहे हैं नाले
मनपा प्रशासन तापी नदी में गिर रहे आउटलेट्स बंद करने को लेकर भी ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं कर पाया है। तापी नदी का बहाव भले कोजवे पर रुक जाता हो, लेकिन नदी के डाउन स्ट्रीम मेें ड्रेनेज आउटलेट्स खुले पड़े हैं। यह ड्रेनेज आउटलेट्स उस वक्त खतरे का सबब बन सकते हैं, जब मानसून के दौरान तापी पूरे वेग से बहेगी। मानसून के दौरान जब तापी नदी किनारे तोड़ते हुए बहती है तो नदी का पानी निचले क्षेत्रों में भर जाता है। नदी के बहाव क्षेत्र में गिर रहे ड्रेनेज आउटलेट्स उस वक्त लोगों के लिए परेशानी की बड़ी वजह बन सकते हैं।