
सूरत।गोडादरा क्षेत्र में साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची से दरिंदगी के आरोपित अनिल यादव को क्राइम ब्रांच ने चार दिन बाद शुक्रवार को बिहार से गिरफ्तार कर लिया। उसे सूरत लाने की कवायद चल रही है।
डीसीपी (क्राइम) राहुल पटेल ने बताया कि बिहार के बक्सर जिले के लोहाड़ी गांव के मूल निवासी अनिल यादव को बक्सर जिले के धनसोई गांव से गिरफ्तार किया गया। धनसोई उसके गांव के निकट ही है। वहां वह अपने एक रिश्तेदार के यहां छिपा हुआ था।
पहले उसके घर पर दबिश दी गई, वहां वह नहीं मिला। पुलिस टीम ने गांव से लौटने का नाटक किया, लेकिन पीसीबी की एक टीम को वहीं छोड़ दिया। पीसीबी टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से उसका सुराग लगाया और शुक्रवार को उसे धनसोई से धर दबोचा। उसने किस तरह घटना को अंजाम दिया और सूरत से वहां कैसे पहुंचा, इस बारे में फिलहाल पूछताछ नहीं हो पाई है।
उल्लेखनीय है कि गोडादरा क्षेत्र में रहने वाले महाराष्ट्रीयन दलित परिवार की साढ़े तीन साल की बच्ची रविवार रात घर के बाहर खेलते हुए लापता हो गई थी। जिस इमारत में वह किराए के मकान में रहती थी, उसी के भूतल के एक कमरे से सोमवार शाम उसका प्लास्टिक के बोरे में बंधा शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची से बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और गला घोंट कर हत्या करने की पुष्टि हुई थी। जिस कमरे से शव बरामद हुआ था, उसमें रहने वाला अनिल यादव रात को कमरे पर ताला लगा कर फरार हो गया था। पुलिस का मानना है कि अनिल ने ही बच्ची का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी।
आरोपितों की अर्जी पर कोर्ट ने दिया नार्को टेस्ट का आदेश
उधना क्षेत्र में सोलह साल की किशोरी के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में आरोपितों द्वारा नार्को टेस्ट के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपितों का नार्को पोलिग्राफिक टेस्ट करवाने का आदेश दिया है। किशोरी के नार्को टेस्ट की मांग को खारिज कर दिया गया।
किशोरी ने १७ अगस्त को उधना थाने में पांच जनों पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इसमें बताया गया था आठ महीने पहले सोशल मीडिया के जरिए वह अजय के संपर्क में आई। अजय ने अपने मोबाइल पर उसका बिना कपड़े का फोटो दिखा कर उसके साथ बलात्कार किया। बाद में उसके चार मित्रों ने भी उसके साथ कई बार बलात्कार किया। इस मामले में उधना पुलिस ने पांचों आरोपितों को पकड़ लिया। इनमें दो नाबालिग थे। उन्हें बाल सुधार गृह भेज दिया गया। अन्य तीन को लाजपोर जेल भेजा गया।
पांडेसरा दक्षेश्वरनगर निवासी अजय उर्फ अज्जू पारीक और उधना हरिनगर-३ निवासी साहिल सिंह दो महीने से न्यायिक हिरासत में है। पूछताछ के दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए उधना पुलिस से उनका नार्को समेत अन्य सभी टेस्ट करवाने की गुहार लगाई थी, लेकिन पुलिस ने टेस्ट नहीं करवाए। बाद में उन्होंने उन्होंने अपने वकील विनय शुक्ला के मार्फत सत्र न्यायालय में अपना और शिकायतकर्ता का नार्को टेस्ट करवाने की मांग को लेकर याचिका दायर की। उन्होंने सत्य जानने के लिए टेस्ट के लिए होने वाला खर्च स्वयं वहन करने पर सहमति दी। याचिका पर विचार कर कोर्ट ने किशोरी से टेस्ट के बारे में पूछा तो उसने किसी प्रकार का टेस्ट करवाने से मना कर दिया। कोर्ट ने गांधीनगर फोरेन्सिक लैब में दोनों आरोपितों के नार्को और पोलिग्राफिक टेस्ट करवाने का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता के अधिकार के तहत नार्को टेस्ट के लिए संबंधित व्यक्ति की अनुमति आवश्यक है।