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गुजरात : सूरत में नरेंद्र मोदी के नाम पर रख दिया मछली बाजार का नाम, हुआ विवाद तो ढंक दिया बोर्ड

Surat Fish Market: नानपुरा-लक्कड़कोट क्षेत्र में करीब 3.90 करोड़ रुपए की लागत से बने फिश मार्केट के नामकरण को लेकर विवाद शुरू हो गया है। बाजार पर नरेंद्र मोदी के नाम का बोर्ड लगाए जाने के विरोध में व्यापारियों के एक गुट ने आपत्ति जताई है।
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सूरत

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Rakesh Mishra

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Updated: 25 Aug 2026, 5:00 PM IST

Surat Fish Market

सूरत फिश मार्केट। फोटो- पत्रिका

सूरत। नानपुरा-लक्कड़कोट क्षेत्र में करीब 3.90 करोड़ रुपए की लागत से तैयार फिश मार्केट के नामकरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। महानगरपालिका की ओर से बनाए गए इस बाजार पर ‘श्री नरेंद्र मोदी होलसेल फिश मार्केट’ का बोर्ड लगा दिया गया, लेकिन खास बात यह है कि बाजार के नामकरण को लेकर महानगरपालिका की सामान्य सभा या सांस्कृतिक समिति में अब तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है। इसी को लेकर व्यापारियों के एक गुट ने विरोध जताया है। इस बीच मंगलवार को बोर्ड को सफेद चादर से ढंक दिया गया।

बोर्ड हटाने की मांग

फिश मार्केट के व्यापारी सुरेंद्र लश्करी ने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और वे शुद्ध शाकाहारी हैं। उन्होंने कभी सी-फूड का सेवन नहीं किया है। ऐसे में मांसाहारी बाजार के साथ उनका नाम जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाजार का नामकरण फिश मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कल्पेश नवसारीवाला ने अपनी मनमर्जी से किया है। व्यापारियों की मांग है कि प्रधानमंत्री की छवि को लेकर किसी तरह का विवाद खड़ा न हो, इसलिए लगाया गया बोर्ड हटाया जाए और बाजार का नाम कहार-माछी समाज के नाम पर रखा जाए।

अध्यक्ष बोले- मोदी सरकार ने मछुआरों के लिए अलग मंत्रालय बनाया

दूसरी ओर फिश मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कल्पेश नवसारीवाला ने नाम को लेकर विरोध को गलत बताया। उन्होंने कहा कि व्यापारी यहां अवैध रूप से नहीं बैठे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मछुआरों के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया और मत्स्य संपदा योजना के तहत करोड़ों रुपए का प्रावधान किया गया है। ऐसे में बाजार पर प्रधानमंत्री का नाम होने को लेकर विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।

43 लाख रुपए की डिपॉजिट जमा कराई

उन्होंने कहा कि बाजार महानगरपालिका के प्रस्ताव के अनुसार ही शुरू किया गया है। व्यापारियों ने करीब 43 लाख रुपए की डिपॉजिट जमा कराई है और नौ महीने का अग्रिम किराया भी दिया है। भाजपा नेताओं के प्रयासों से बाजार का निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारी बोर्ड हटाने की अनुमति नहीं देंगे।

मनपा बोली- नामकरण का प्रस्ताव ही नहीं हुआ

विवाद के बीच महानगरपालिका की भूमिका भी सामने आई है। नियमानुसार मनपा की ओर से निर्मित किसी बाजार का नामकरण करने के लिए सांस्कृतिक समिति या सामान्य सभा में आधिकारिक प्रस्ताव पारित करना आवश्यक है। हालांकि अब तक ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं होने की बात सामने आई है। सेंट्रल जोन के कार्यपालक अभियंता राजेश गांजावाला ने बताया कि बिना अनुमति नामकरण कर बोर्ड लगाए जाने की जानकारी मिलने के बाद मनपा की टीम बोर्ड हटाने पहुंची थी। हालांकि स्थानीय व्यापारियों ने खुद बोर्ड हटाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद टीम वापस लौट गई।

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