उत्तर-पूर्व में पाकिस्तान और राजस्थान, पूर्व में मध्यप्रदेश, दक्षिण में महाराष्ट्र और दीव, दमन, दादरा और नगर हवेली केंद्र शासित प्रदेशों की सीमा के बीच है गुजरात। राज्य की सीमा पश्चिम और दक्षिण पश्चिम में अरब सागर से लगती है। सिंधु घाटी सभ्यता के मुख्य केंद्र के रूप में कार्य करने वाले गुर्जर प्रदेश गुजरात के सैकड़ों रोचक तथ्य हैं।
भौगोलिक आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक साहित्यिक और कई तरह के रंग समेटे गुजरात का गौरव देश के राज्यों से कुछ अलग ही है। 1 मई को गुजरात स्थापना दिवस होता है। इस राज्य की विविधताओं और विकास के मूल मंत्र को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए राजस्थान पत्रिका ने तय किया कि गुजराती स्थापना दिवस केवल एक ही मनाने के बदले इसे सप्ताह के रूप में समाचार पत्र में जगह दी जाए, जिससे हमारे गरवी गुजरात कॉलम के जरिए इसके रोचक तथ्य को हर पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया जा सके।
एक नजर भौगोलिकता पर :
करीब 1600 किलोमीटर समुद्री सीमा से लगे गुजरात में कई प्रमुख बंदरगाह राष्ट्र के विकास में योगदान देते हैं। इनमें कांडला, मांडवी, मुंद्रा, सिक्का, ओखा, पोरबंदर, वेरावल, भावनगर, सलाया, पिपावाव, महुवा, जाफराबाद, दहेज,हजीरा।
- क्षेत्र: 1,96,024 वर्ग किमी करीब।
जनसंख्या: 60,383,628 से अधिक।पारिस्थितिक तंत्र : रेगिस्तान, झाड़ियों, घास के मैदानों, पर्णपाती वनों और आर्द्रभूमि से लेकर मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियों, ज्वारनदमुख और खाड़ी तक की श्रृंखलाएं।
0 ऐसे बना गुजरात :
- महात्मा गांधी और सरदार पटेल की कर्मभूमि गुजरात आज़ादी के वक्त इस नाम से नहीं जानी जारी थी। आज़ादी से पहले यह अंग्रेज़ों की हुकूमत वाले बंबई प्रेसीडेंसी का हिस्सा था। 1947 के बाद इसे बंबई राज्य में शामिल किया गया था। आज़ादी के बाद जब भाषाई आधार पर राज्यों की मांग ज़ोर पकड़ने लगी तो श्याम कृष्ण धर आयोग का गठन किया गया। इस आयोग ने भाषाई आधार पर राज्यों के गठन को देशहित में उचित नहीं बताया। फिर भी महागुजरात आंदोलन व लगातार उठ रही मांगों को देखते हुए जेबीपी आयोग का गठन किया गया। जिसने भाषाई आधार पर राज्यों के गठन का सुझाव दिया। 1960 में बंबई राज्य को दो भागों में बांट दिया गया। फिर हुआ गुजरात का जन्म।