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Cyber Fraud: साइबर क्राइम सेल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विशाल देसाई, जरीथ गौस्वामी और जिगर कुंभाणी के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी लंबे समय से दुबई में बैठकर शेयर बाजार और करेंसी ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे। यह कार्रवाई उस समय की गई जब तीनों आरोपी एयर इंडिया एक्सप्रेस की दुबई-सूरत उड़ान से भारत पहुंचे। जानकारी के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पहले से ही लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया गया था। जैसे ही वे सूरत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे, इमिग्रेशन अधिकारियों ने सक्रिय एलओसी के आधार पर उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें आगे की जांच के लिए साइबर क्राइम सेल को सौंप दिया गया।
पुलिस जांच में इस नेटवर्क से जुड़े चौंकाने वाले वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं। अब तक की जांच में 1536 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध ट्रांजेक्शन का पता चला है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने बिना किसी वैध लाइसेंस और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की मंजूरी के एक फर्जी निवेश कंपनी का संचालन किया। इसके जरिए लोगों को शेयर बाजार और करेंसी ट्रेडिंग में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता था। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क देश के 23 राज्यों तक फैला हुआ था। ठगी से प्राप्त धनराशि को इकट्ठा करने और विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने के लिए करीब 40 बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस का आरोप है कि एकत्र की गई रकम को हवाला, आंगड़िया नेटवर्क और शेल कंपनियों के माध्यम से दुबई भेजा जाता था, जिससे धन के वास्तविक स्रोत और उपयोग को छिपाया जा सके।
मामले की जांच पहले से जारी थी और इस प्रकरण में अब तक पांच अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। तीन प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
Updated on:
19 Jun 2026 05:23 am
Published on:
19 Jun 2026 05:22 am
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