
दीघा जगन्नाथ मंदिर
Digha Jagannath Temple: पश्चिम बंगाल के तटीय शहर दीघा में बने नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। इस बार आपत्ति मंदिर के नाम को लेकर नहीं, बल्कि वहां स्थापित भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाओं को लेकर दर्ज की गई है। पुरी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और उससे जुड़े सेवायतों ने मांग की है कि दीघा मंदिर में स्थापित पत्थर की मूर्तियों को हटाकर उनकी जगह लकड़ी से निर्मित ‘दारुब्रह्म’ प्रतिमाएं स्थापित की जाएं। पुरी मंदिर से जुड़े अधिकारियों और सेवायतों का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना जहां भी की जाए, उसे पुरी मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप ही होना चाहिए। उनका मानना है कि भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा का स्वरूप विशेष महत्व रखता है और शास्त्रों में इसके लिए स्पष्ट परंपराएं निर्धारित की गई हैं।
सेवायतों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं परंपरागत रूप से लकड़ी से बनाई जाती हैं, जिन्हें ‘दारुब्रह्म’ कहा जाता है। उनका कहना है कि यही परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने तर्क दिया कि पत्थर की प्रतिमाओं की स्थापना धार्मिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक मानकों के अनुरूप नहीं मानी जाती। इसलिए दीघा मंदिर में भी लकड़ी की प्रतिमाएं स्थापित की जानी चाहिए, ताकि पूजा-पद्धति और धार्मिक पवित्रता बनी रहे।
यह पहला मौका नहीं है जब दीघा के जगन्नाथ मंदिर को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले मंदिर के नाम के साथ 'धाम' शब्द जोड़ने पर भी ओडिशा सरकार और पुरी मंदिर प्रशासन ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि 'धाम' शब्द का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है और इसका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। आपको बता दें कि तत्कालीन ममता सरकार के कार्यकाल में मंदिर के नाम के साथ 'धाम' शब्द का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि हाल ही में पश्चिम बंगाल में बनी नई भाजपा सरकार ने इस विवाद को ध्यान में रखते हुए मंदिर के नाम से 'धाम' शब्द हटाने की घोषणा कर दी थी। अब प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर उठी नई आपत्ति ने दीघा जगन्नाथ मंदिर को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पुरी प्रशासन की इस मांग पर आगे क्या फैसला लिया जाएगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
Published on:
19 Jun 2026 05:00 am
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