कपड़ा उद्यमियों की शनिवार को बैठक
सूरत.
केन्द्र सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए बार-बार गुहार लगा रहे वीवर्स को सरकार ने रिफंड तो दिया नहीं, बल्कि उस पर 18 प्रतिशत ब्याज की रिकवरी शुरू कर दी है। कपड़ा उद्यमियों में इस फैसले के खिलाफ नाराजगी है। शनिवार को इस सिलसिले में कपड़ा उद्यमियों की बैठक होनी है। इसमें वह आगे की रणनीति तय करेंगे।
कपड़ा उद्योग के सूत्रों के अनुसार जीएसटी लागू होने के बाद यार्न पर 12 प्रतिशत ड्यूटी और कपड़े पर पांच प्रतिशत जीएसटी होने के कारण वीवर्स के पास लगभग पांच से सात प्रतिशत इनपुट टैक्स क्रेडिट शेष रह जाती थी। वीवर्स इसका उपयोग नहीं कर पाते थे। एक अनुमान के अनुसार सूरत के वीवर्स के 650 करोड़ रुपए फंस गए हैं, जो कि अकाउंट बुक में दिखते हैं, लेकिन वास्तव में नहीं मिले हैं। इस मुद्दे को लेकर वीवर्स ने केन्द्र सरकार से शेष इनपुट टैक्स क्रेडिट को रिफंड करने के लिए गुहार लगाई, लेकिन सरकार ने वीवर्स की कोई बात नहीं सुनी। वीवर्स के अनेक प्रयास के बाद केन्द्र सरकार की ओर से गत जुलाई में एक परिपत्र में बताया गया कि यदि वीवर्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट चाहिए तो उन्हें 1 जुलाई-17 से 31 जुलाई-18 तक की आइटीसी लैप्स करनी होगी। इसके बाद ही वह नई आइटीसी के लिए क्लैम कर सकेंगे। वीवर्स इसके खिलाफ हाइकोर्ट में गए थे, जहां कि कोर्ट ने यह फैसला किया है कि वीवर्स को आइटीसी क्लैम करने के लिए उसमें ऑब्जेक्शन लिखना होगा। इस दौरान गुरुवार को एक्साइज विभाग के एक परिपत्र में बताया गया है कि जिन वीवर्स ने अभी तक आइटीसी क्रेडिट को लैप्स के तौर पर नहीं बताया है, वह यदि अब लैप्स बताते हैं तो उन्हें सालाना 18 प्रतिशत ब्याज के साथ रकम चुकानी होगी।
इस फैसले के कारण वीवर्स नाराज हैं। उनका कहना है कि एक ओर हमारे अधिकार के 650 करोड़ रुपए सरकार नहीं दे रही और अब उस पर 18 प्रतिशत ब्याज मांग रही है। सरकार के इस फैसले के विरोध में शनिवार को कपड़ा उद्यमियों की शाम चार बजे रिंगरोड जे.के टावर के पीछे जय सागर कॉम्प्लेक्स में बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। फैडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स एसोसिएशन के प्रमुख अशोक जीरावाला ने बताया कि सरकार के इस फैसले के खिलाफ हम मुहिम शुरू करेंगे।