
सिलवासा. गुरु पूर्णिमा पर मंगलवार को मंदिरों में गुरु महिमा पर अभिषेक, हवन अनुष्ठान, मंत्र जाप आदि विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। आमली दत्तधाम में श्रद्धालुओं ने पादुका पूजन, समूह अभिषेक, गुरु मंत्रणा, दीक्षा, जाप, अनुष्ठान में हिस्सा लेकर गुरु महिमा का बखान किया। दत्त गुरु को प्रतिमा को नमन करके उनके चरण छुए।
गायत्री मंदिर में गुरु पूजन, हवन, मंत्रजाप के बाद पंडितों ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डाला। यहां मंदिर फलिया, चाणददेवी, डोकमर्डी, झंडा चौक और आसपास से श्रद्धालु पहुंचे। पंडित दीपक महाराज ने कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु का आशीर्वाद लेने से वर्ष भर के कार्य सफल हो जाते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने स्वामीनारायण मंदिर में गुरु प्रतिमा को कमल फूल चढ़ाकर तिलक लगाया। कार्यकर्ताओं ने गुरु महिमा का बखान किया। वनवासी कल्याण आश्रम के बंधुओं ने पौधारोपण करके गुरुओं को नमन किया। स्वामी समर्थ केन्द्र पर मंत्रजाप, गुरु पूजन का विशेष कार्यक्रम हुए। सनातन धर्म में गुरु को भगवान से ऊपर माना गया है। गुरु शिरोमणि है, गुरु संसार का मार्गदर्शक है, इस विषय पर कुड़ाचा ओमकार मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। मंदिर में हवन और अनुष्ठान के बाद पादुका पूजा, गुरुज्ञान, गुरू चालीसा पाठ आदि चले। यहां गुरु को देवों से बड़े आसन पर पूजा गया। मंदिर में निखिलेश्वर भगवान को गुरु की उपमा दी गई है। मंदिर में गुरु के साथ भगवान विष्णु और शिव की आराधना की। मंदिर के प्रमुख पीजे पटेल ने बताया कि गुरु की कृपा से देश का अनोखा ओमकार मंदिर का निर्माण संभव हो सका है। मंदिर में 108 देवों के स्थान बनाए गए हैं।
गुरु पूजन का कार्यक्रम दोपहर एक बजे तक पूरा
खंडग्रास ग्रहण के कारण सर्वत्र गुरु पूजन का कार्यक्रम दोपहर एक बजे तक पूरा हो गया। गुरु पूजन के बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए। सूतक के दौरान सोसायटियों में भजन-कीर्तन होते रहे। घरों में हवन, मंत्र-जाप आदि चलते रहे।