मिट्टी की मूर्ति की मांग ज्यादा
वापी. गणेश चतुर्थी के नजदीक आते ही गणपति महोत्सव की तैयारी का असर क्षेत्र मे दिखने लगा है। वापी में जगह जगह गणपति प्रतिमा के मूर्तिकारों ने दुकान शुरु कर दी है।
क्षेत्र में सार्वजनिक पंडालों सहित हजारों घरों में भी गणेश जी की स्थापना की जाती है। इसे देखते हुए स्थानीय मूर्तिकारों के अलावा अहमदाबाद, महाराष्ट्र, राजकोट, भावनगर समेत अन्य कई जगहों से मूर्तिकार व विक्रेता परिवार के साथ यहां पहुंच गए हैं और तरह तरह की आकर्षक गणेश जी की मूर्ति को आकार दे रहे हैं। इस बारे में वापी के पुराने मूर्ति कलाकार विशाल शिंदे ने बताया कि गणेश उत्सव का उत्साह इतना ज्यादा है कि अब तक उनके यहां बनी 85 प्रतिशत मूर्तियां बुक कर ली गई हैं।
पर्यावरण के प्रति आई जागरुकता के कारण सिर्फ मिट्टी की ही मूर्तिया बनाने वाले विशाल शिंदे ने बताया कि श्रद्धालुओं में मिट्टी की प्रतिमा की मंाग हर साल बढती जा रही है। क्योंकि ऐसी प्रतिमाएं विसर्जन के दौरान पानी में गल जाती हैं। मूर्ति की सजावट के लिए प्लास्टिक एवं अन्य चीजों का उपयोग भी विशाल शिंदे ने बंद कर दिया है और लोगों को भी जीव सृष्टि के लिए हानिकारक चीजों का उपयोग सजावट में न करने की सलाह देते हैं।
उन्होंने बताया कि इस बार अभी तक सबसे बड़ी प्रतिमा चार फीट की बनाई है। मूर्ति की सजावट के लिए वाटर कलर का ही उपयोग करने वाले विशाल शिंदे ने बताया कि इस बार अब तक 280 पंडाल वालों ने उनके पास गणपति जी की प्रतिमा बुक करवाई है। लोगों का पीओपी प्रतिमा के प्रति रुझान कम हो रहा है और बड़ी प्रतिमा की मांग भी घट रही है।
कोपरली रोड पर अंबामाता मंदिर के पास और सेन्ट् जेवियर्स के पास भी गणपति की मूर्ति बेचने के लिए अन्य शहरों से लोग आए हैं। अंबामाता मंदिर के पास भावनगर से आए कलाकार ने बताया कि छोटी प्रतिमाओं की ज्यादा मांग है। बड़ी कम संख्या में लोग बड़ी मूर्ति बुक करवा रहे हैं।