
सूरत.
केन्द्र सरकार की ओर से नायलॉन यार्न पर एंटी डम्पिंग ड्यूटी हटाने के फैसले के कुछ दिन बाद साउथ गुजरात नायलॉन स्पिनर्स एसोसिएशन ने फैसले पर पुनर्विचार के लिए गुहार लगाई है। साथ ही, फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
नायलॉन यार्न पर एन्टी डंपिंग ड्यूटी की मांग है। सिल्कसिटी सूरत में पॉलिएस्टर यार्न के अलावा नायलॉन, बेम्बर्ग, विस्कोस आदि यार्न का उपयोग किया जाता है। पॉलिएस्टर के बाद नायलॉन का इस्तेमाल अधिक होता है। सूरत समेत दक्षिण गुजरात में नायलॉन यार्न के कई प्रोजेक्ट हैं। कुछ दिन पहले सरकार ने चीन, ताइवान, मलेशिया और कोरिया से आने वाले नायलॉन यार्न से एंटी डम्पिंग ड्यूटी हटाने का फैसला किया। स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि इस फैसले से यहां के नायलॉन उद्यमियों का अस्तित्व संकट में आ गया है, क्योंकि विदेश से आयातित यार्न पर अब तक 0.20 सेंट से 1.20 डॉलर तक एंटी डम्पिंग ड्यूटी लगती थी, अब ड्यूटी नहीं लगने से विदेशी यार्न स्थानीय यार्न से 10 से 50 प्रतिशत तक सस्ता हो जाएगा। स्थानीय उद्यमियों के सामने प्रतिस्पर्धा में टिक पाने की चुनौती होगी। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। यहां के उद्यमियों का प्रतिस्पर्धा में टिक पाना मुश्किल होगा। केन्द्र के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई है।
कानूनी कार्रवाई
एंटी डम्पिंग ड्यूटी लगाने से विदेशी यार्न सस्ता हो जाएगा। इसका नुकसान स्थानीय उद्यमियों को भोगना पड़ेगा। साउथ गुजरात नायलॉन स्पिनर्स एसोसिएशन ने फैसले पर पुनर्विचार के लिए गुहार लगाई है। इस फैसले के खिलाफ केन्द्र सरकार से मांग की है और कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है।
विनय अग्रवाल, उद्यमी
उद्यमी मुश्किल में
विदेश से आयातित यार्न पर अब तक 0.20 सेंट से 1.20 डॉलर तक एंटी डम्पिंग ड्यूटी लगती थी, अब ड्यूटी इस फैसले के कारण विदेशी यार्न 10 से 50 प्रतिशत तक सस्ता हो जाएगा। स्थानीय उद्यमियों के सामने प्रतिस्पर्धा में टिक पाने की चुनौती होगी। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
नारायण अग्रवाल, उद्यमी