अधिवक्ता अश्विन जोगडिया के अनुसार अप्रेल 2026 में गुजरात हाईकोर्ट ने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे एक पति की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दर्ज करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया था। हाईकोर्ट ने तकनीक के इस्तेमाल पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि ‘तकनीक न्याय की दासी होनी चाहिए, रास्ते का पत्थर नहीं।’ तकनीकी व्यवस्था आसान, सटीक और आम पक्षकारों के लिए सुलभ होनी चाहिए।