दर्जनों टैक्सटाइल मार्केट निर्मित, कई हैं अभी भी निर्माणाधीन
सूरत. जिलेभर में करीब 70 किलोमीटर की यात्रा तय कर मिंढ़ोला खाड़ी (समुद्र) में मिलने वाली खाड़ी ने हाल में सूरत शहर के कई क्षेत्रों में मुश्किलों के हालात पैदा कर दिए हैं और इस पर कई जगहों पर बड़े-बड़े भीमकाय टैक्सटाइल मार्केट इमारतें बनकर तैयार है तो कई बनने की तैयारी में है। खाड़ी किनारे कुंभारिया गांव से भाठेना गांव तक निर्मित कई टैक्सटाइल मार्केट और उसके आसपास के हालात पर नजर डालें तो साफ प्रतीत होता है कि अधिकांश स्थलों पर खाड़ी का पानी बाहर फैला हुआ है और इसकी वजह में जानकार बताते हैं कि खाड़ी किनारे की जमीनें भवन निर्माता अन्य जमीन की अपेक्षा सस्ते में हासिल कर लेते हैं और यहां पर उन्हें अतिक्रमण करने में भी आसानी रहती है क्योंकि खाड़ी के हिस्से का वे ब्यूटीफिकेशन के नाम पर मानों सरकारी तंत्र से कब्जे का अधिकार पा लेते हैं। यहीं वजह रहती है कि तेज बारिश से जिलेभर का जमा पानी खाड़ी के जरिए समुद्र तक की यात्रा तय करता है लेकिन, जहां भी ब्यूटीफिकेशन के नाम पर खाड़ी को उसके मूल स्वरूप से संकरा किया गया वहीं, उसका रोद्र रूप भी लोगों को देखना पड़ रहा है। शहर के अलग-अलग क्षेत्र में खाड़ी किनारे की स्थिति पर एक रिपोर्ट।
कुंभारिया गांव
स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो डेढ़-दो दशक पहले सूरत जिले में खूब बारिश होती थी और उसका भी असर इस तरह से देखने को नहीं मिलता था जो आज दिखाई दे रहा है। खाड़ी किनारे गत वर्षों में यहां आधा दर्जन बड़ी-बड़ी इमारतें बनकर खड़ी हो गई है, जिससे निश्चित ही खाड़ी ने मूल स्वरूप खोया है।
सारोली गांव
यहां भी कमोबेश कुंभारिया गांव जैसे ही हालात पैदा है और उसकी बड़ी वजह में खाड़ी किनारे बने और बन रही इमारतें भी कुछ हद तक जिम्मेदार है। क्षेत्र में कई टैक्सटाइल मार्केट इमारतें फिलहाल निर्माणाधीन है, जिनका हिस्सा पानी में भी डूबा है।
मगोब गांव
सूरत महानगरपालिका में कई वर्षों पहले शामिल इस क्षेत्र का विकास गत चार-पांच वर्षों में अधिक हुआ है और उसी का परिणाम है कि यहां भी खाड़ी किनारे मार्केट इमारतें बनकर तैयार हो चुकी है और हो भी रही है।
भाठेना गांव
यहां भी खाड़ी किनारे कुछ ऐसे ही हालात है। जहां भी थोड़ी-बहुत खाली जगह मिली उसे खरीदकर व आसपास की जगह पर ब्यूटीफिकेशन के नाम पर कब्जा जमाकर खाड़ी को संकरी बना दिया गया है।