
सूरत।अब तक जीएसटी में सरलीकरण की मांग से परहेज कर रही सरकार शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में व्यापारियों को कई राहत दे सकती है। व्यापारियों का कहना है कि चुनाव के कारण ही सही, हमें जीएसटी के शिकंजे से राहत मिलनी चाहिए।
सूरत के कपड़ा व्यापारी जीएसटी लागू होने के बाद से इसके सरलीकरण की मांग कर रहे हैं। व्यापारियों ने हड़ताल की, नेताओं से मुलाकात की, दिल्ली के चक्कर लगाए, वित्तमंत्री अरुण जेटली से मिले, लेकिन तीन महीने तक किसी ने कुछ नहीं किया। अब चुनाव के माहौल में व्यापारियों का दर्द सबको सुनाई दे रहा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी सूरत याद आने लगा है। दो सप्ताह में दो बार वह सूरत आए और व्यापारियों के सुर में सुर मिलाकर जीएसटी को कोस रहे हैं। दूसरी ओर व्यापारियों को समय नहीं देने वाली कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने भी बुधवार को दिल्ली में कपड़ा व्यापारियों की बात गंभीरता से सुनी।
शुक्रवार को गुवाहाटी में जीएसटी काउंसिल की बैठक होनी है। सूरत के कपड़ा उद्यमियों को उम्मीद है कि उनकी आधी से ज्यादा मांगें स्वीकार कर ली जाएंगी। उनकी मांग है कि मासिक के स्थान पर त्रैमासिक रिटर्न हो, वीवर्स को ओपनिंग स्टॉक पर टैक्स क्रेडिट मिले, ई-वे बिल का नियम हटाया जाए, जीएसटीएन का सॉफ्टवेयर सुधारा जाए, जीएसटी का सरलीकरण किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि पहले जब हम सरकार के पास जीएसटी की समस्याएं सुनाने जाते थे तो हमें सांत्वना का झुनझुना थमा दिया जाता था, लेकिन अब चुनावी माहौल में, जब सूरत में कांग्रेस फिर सक्रिय हो उठी है तो सरकार को कपड़ा उद्यमियों की ताकत का एहसास होने लगा है।
पहली बार ई-बैलेट से मतदान करेंगे सैनिक
गुजरात विधानसभा चुनाव में सैनिक पहली बार ई-बैलेट का उपयोग करेंगे। सूरत जिले में 139 सैनिकों का पंजीकरण हुआ है, जिनका मत ई-बैलेट से दर्ज किया जाएगा। मतदान के लिए ई-बेलेट कमांडिंग ऑफिसर को भेजा जाएगा। सूरत जिले के 16 विधानसभा क्षेत्रों में 40 लाख से अधिक मतदाता दर्ज किए गए हैं। इनमें 139 सैनिक शामिल हैं। सैनिकों की देश में अलग-अलग जगह ड्यूटी के कारण वह मतदान के लिए विधानसक्षा क्षेत्र में उपस्थित नहीं हो सकते। इसलिए उनके मतदान के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। पहले वह बैलेट पेपर से मतदान करते थे। पहली बार वह ई-बैलेट का उपयोग करेंगे। सैनिकों के कमांडिंग ऑफिसर को नेट के जरिए ई-बैलेट भेजा जाएगा। सैनिकों के मत दर्ज करने के बाद ई-बैलेट चुनाव अधिकारी को पहुंचा दिया जाएगा।