उत्पादन पर बुरा असर हो रहा है
सूरत
कपड़ा उद्योग में श्रमिकों की कमी के कारण कई जगह एक शिफ्ट में काम चल रहा है। विदेशों से मिले ऑर्डर के अनुसार उत्पादन नहीं हो पा रहा है. डाइंग-प्रोसेसिंग और एम्ब्रॉयडरी यूनिट मे सप्ताह में तीन दिन ही काम चल रहा है। दिवाली वेकेशन पर बाहर गए श्रमिकों में से 25 प्रतिशत श्रमिक अब तक नहीं लौटे हैं. श्रमिक एक सप्ताह और नहीं लौटे तो कपड़ा उद्योग को करोड़ों का नुकसान हो सकता है।
कपड़ा उद्यमियों का कहना है कि इस बार दिवाली से पहले ही श्रमिक शहर से जाने लगे थे। कपड़ा उद्योग में मंदी के कारण श्रमिकों को ज्यादा वेतन नहीं मिल पा रहा है, इसलिए कई श्रमिक व्यवसाय छोड़कर अन्य व्यवसाय में जा रहे हैं। दिवाली वेकेशन पर बाहर गए श्रमिकों में से 25 प्रतिशत श्रमिक अब तक नहीं लौटे हैं। इससे विदेशों से मिले ऑर्डर के अनुसार उत्पादन नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा घरेलू बाजार में आगामी दिनों में लग्नसरा की खरीद होनी है। यदि श्रमिक एक सप्ताह और नहीं लौटे तो कपड़ा उद्योग को करोड़ों का नुकसान हो सकता है।
सूरत के कपड़ा उद्यमी भी बना रहे ब्लेन्डेड कॉटन
सूरत में कॉटन कपड़े नहीं बनने के कारण यहां के उद्यमी प्रतिदिन भिवंडी, इरोड, मालेगांव और इच्छल करंजी से 50-70 लाख ग्रे कपड़े मंगाते हैं, जो कि यहां पर डाइंग-प्रोसेसिंग यूनिट में प्रोसेस होते हैं।कपड़ा उद्यमियों का कहना है कि उद्यमियों का कहना है कि कॉटन कपड़े सूरत में नहीं तैयार होते क्योंकि इसले लिए लूम्स मशीनों में साइज बीम लगाना पड़ता है। कपड़ा उद्यमियों का कहना है कि इन चीजों में कभी सूरत के उद्यमियों की मास्टरी थी, लेकिन तब सूरत के उद्यमियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और अब समय के साथ नई पीढी के पास इसका ज्ञान कम है। हालाकि अभी भी सूरत के उद्यमी ब्लेन्डेड कपड़़ो का उत्पादन करते हैं।