
सूरत
पार्लियामेन्ट कमेटी ऑफ एम्पावरमेन्ट वुमेन की 10 महिला सांसदो ने पांडेसरा जीआईडीसी में लक्ष्मीपति मिल का दौरा कर महिलाओं से जानकारी ली और वहीं से महिलाओं के हालात जानने का प्रयास किया, लेकिन चर्चा रही कि बड़े औद्योगिक एकमों में तो सब कुछ पहले से ही ठीक है और वहां श्रमिकों के लिए व्यवस्थाएं भी होती है। यदि वास्तविक परिस्थिति जाननी है तो कुछ छोटे यूनिट में जाए और वहां जीएसटी के बाद क्या असर पड़ा है। उससे महिला श्रमिकों के रोजगार पर क्या असर पड़ा है। यह जानने का प्रयास करते तो शायद कुछ और तस्वीर भी सामने आ सकती थी। क्योंकि जीएसटी के बाद सूरत का कपड़ा उद्योग गंभीर ढंग से पीडि़त हो गया है। कई छोटे लूम्स कारखाने बंद हो गए है। फोस्टा का कहना है कि पहले कपड़़ा मार्केट की दुकानों से कई महिलाए साड़़ी में टिक्की लगाने या छोटे छोटे काम करने के लिए साडियां ले जाती थी, लेकिन जीएसटी के बाद मंदी के कारण वह बेरोजगार हो गई हैं। यदि उन कारखानों में भी टीम जाती और महिलाओं से कुछ बातें करती तो कुछ और परिस्थिति का भी ख्याल आता। हालाकि बुधवार को महिला एम्पावरमेट के सदस्यों को सब कुछ सही मिला।
सुमुल डेरी और धर्मनंदन यूनिट का दौरा
टैक्सटाइल इन्डस्ट्री में महिलाओं की परिस्थिति जानने के बाद महिला सांसदो की टीम डेयरी इन्डस्ट्री में महिलाओं की परिस्थिति समझने के लिए सुमुल डेरी का दौरा कर वहां काम करने वाली महिलाओं और डेरी के बड़े अधिकारियों से चर्चा की। डेयरी में काम करने वाली महिलाओं से उन्होंने वहां मिल रही सुविधाओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजाम की जानकारी ली इसके बाद धर्मनंदन डायमंड में इसके बाद धर्मनंदन डायमंड में जाकर हीरों का कारोबार समझा और वहां काम करने वाली महिलाओं को क्या सुविधा दी जाती है इसके बारे में जानने का प्रयास किया।