कपड़ा व्यापारियों का विरोध हुआ मुखर, लम्बे अरसे से ठप पड़ी है चुनाव प्रक्रिया
सूरत
कपड़ा बाजार के सैकड़ों व्यापारियों की संस्था फैडरेशन ऑफ सूरत टैक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन (फोस्टा) के चुनाव की मांग जोर पकड़ती जा रही है, लेकिन मौजूदा पदाधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंग रही है। फोस्टा पदाधिकारियों और अन्य सदस्यों की तंद्रा तोडऩे के लिए अब कपड़ा बाजार में हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की गई है।
तीन साल के लिए फोस्टा के 21 सदस्यों के अंतिम चुनाव छह साल पहले हुए थे। उसके बाद से फोस्टा चुनाव की प्रक्रिया कुर्सी के मोह में अटकी पड़ी है। पिछले साल काफी दबाव के बाद चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन वह रंगीन कपड़ा व्यापारियों समेत अन्य मुद्दों में उलझाकर रोक दी गई, अन्यथा उस दौरान फोस्टा कार्यकारिणी ने सहमति से चुनाव अधिकारियों के नाम तक तय कर लिए थे। इसी बीच, कपड़ा व्यापारी जीएसटी, इ-वे बिल समेत अन्य नए कर प्रावधानों में उलझकर रह गए। जीएसटी आंदोलन के दौरान कपड़ा व्यापारियों ने संगठन का अभाव झेला। कई बार प्रशासन और जन प्रतिनिधियों के साथ टेबल पर उनका दावा कमजोर पड़ा। अब एक बार फिर कपड़ा व्यापारियों ने फोस्टा चुनाव की मांग तेज की है। उनका कहना है कि मौजूदा कार्यकारिणी को जल्द चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर लोकतंत्र के प्रति विश्वास को बनाए रखना चाहिए।
अभियान में शामिल
फोस्टा चुनाव के सिलसिले में शनिवार से कपड़ा बाजार में शुरू हुए हस्ताक्षर अभियान के पत्र में मार्केट एसोसिएशन के पदाधिकारी हस्ताक्षर करेंगे। इस अभियान में फोस्टा चुनाव की पिछले साल तैयार की गई मतदाता सूची में शामिल कपड़ा बाजार के 143 से ज्यादा टैक्सटाइल मार्केट एसोसिएशन के पदाधिकारी शामिल होंगे। अभियान के पत्र में वह सभी मुद्दे शामिल किए गए हैं, जिन पर मौजूदा कार्यकारिणी के प्रति कपड़ा व्यापारियों में असमंजस और अविश्वास का माहौल है।
चुनाव के पक्ष में मुद्दे
अवधि पूरी होने के बाद भी पद पर बने रहना लोकतांत्रिक नहीं।
समय बीतने पर भी चुनाव नहीं होने से कपड़ा व्यापारियों में फोस्टा के प्रति अविश्वास।
फोस्टा चुनाव के सिलसिले में मार्केट एसोसिएशन से सदस्यता शुल्क का संग्रह, लेकिन ब्योरा नहीं।
फोस्टा चुनाव के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जानी थी, जो नहीं की गई। अब सुनने को मिला है कि सदस्यों को विश्वास में लिए बगैर कुछ डायरेक्टर अपने तरीके से पंजीकरण की प्रक्रिया कर रहे हैं।
साधारण सभा का अरसे से आयोजन नहीं।
वार्षिक लेखा-जोखा तथा ऑडिट रिपोर्ट सदस्यों को काफी समय से नहीं मिली। त्यागपत्र सौंपने वाले सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार क्यों नहीं किए गए?