Chhattisgarh politics Controversy: ‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम में विधायक पर सार्वजनिक टिप्पणी करना भाजयुमो नेता मनोज साहू को भारी पड़ गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में दिए गए बयान के बाद भाजपा संगठन ने सख्त रुख अपनाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिनों में जवाब मांगा है।
Chhattisgarh politics Controversy: छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र में ‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सामने सार्वजनिक मंच पर विधायक की शिकायत करना भाजपा नेता को भारी पड़ गया। इस मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है और संगठन स्तर पर भी यह विवाद चर्चा का विषय बन गया है। कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान को पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना जा रहा है, जिसके चलते नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा जिला संगठन ने संबंधित नेता से पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा है और 7 दिनों के भीतर लिखित जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। इस घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक माहौल में हलचल बढ़ गई है और मामले पर सभी की नजर बनी हुई है।
दरअसल, 21 मई को ग्राम कुशहा में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम के दौरान भाजयुमो जिला महामंत्री मनोज साहू ने मंच से कहा था कि “माननीय विधायक का सोनहत क्षेत्र में भ्रमण नहीं होता है।” उनके इस बयान को पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना गया और इसे सार्वजनिक मंच पर संगठन की छवि को प्रभावित करने वाला बयान बताया जा रहा है।
इस मामले पर जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से प्रेसवार्ता के दौरान सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह पूरी तरह से पार्टी का आंतरिक मामला है और इसका ‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे संगठनात्मक मुद्दों का समाधान पार्टी स्तर पर ही किया जाता है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
भाजपा कोरिया जिला अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भाजयुमो जिला महामंत्री मनोज साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे 7 दिनों के भीतर लिखित जवाब देने को कहा गया है कि उन्होंने सार्वजनिक मंच पर यह बयान क्यों दिया और संगठन अनुशासन का पालन क्यों नहीं किया।
पार्टी ने साफ कर दिया है कि तय समय सीमा के भीतर जवाब नहीं देने पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।.भाजपा का कहना है कि पार्टी मंच या सरकारी कार्यक्रमों में इस तरह के सार्वजनिक बयान संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए अनुशासन बनाए रखना सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है।