हमारा कोई ज़रुरी काम अटक जाता है तो हमें भगवान से ही आखिरी उम्मीद होती है कि उनकी कृपा से हमारा रुका हुआ काम पूरा हो जाए।
नई दिल्ली। आखिर भगवान हैं कौन, लोगों की इसमें कई राय होती हैं। लेकिन सभी के बीच सबसे बड़ा सच यही है कि भगवान वे हैं जिनसे हमें विश्वास मिलता है। भगवान से ही हमें शक्ति मिलती है, चाहे किसी भी रुप में। अगर हमारा कोई ज़रुरी काम अटक जाता है तो हमें भगवान से ही आखिरी उम्मीद होती है कि उनकी कृपा से हमारा रुका हुआ काम पूरा हो जाए। फिर अगर बात बजरंग बली की हो तो क्या कहने, अपने भक्तों पर हनुमान जी इस कदर दयावान होते हैं कि वे उन्हें किसी भी मुसीबत में नहीं देख पाते।
लेकिन बात की जाए शनि की तो लोगों को हड़का कर रखने वाले ये महाराज बजरंग बली के साथ थोड़ा नरम पड़ जाते हैं। इसके पीछे कई बातें कही जाती हैं। कहा जाता है कि हनुमान जी का जन्म शनिवार के दिन ही हुआ था। इसके अलावा सूर्यदेव शनि के पिता थे। जो बजरंग बली के सूर्यदेव भगवान हनुमान के शिक्षक भी थे।
हिंदू धर्म में माना गया है कि शनिवार के दिन भगवान हनुमान की पूजा करने से शनि महाराज भी प्रसन्न होते हैं। लेकिन दोनों देवों के बीच के इस संबंध का सबसे खास प्रतीक है गुजरात के भावनगर में स्थित सारंगपुर का हनुमान मंदिर। देश भर में यह मंदिर कष्टभंजन हनुमान के नाम से मशहूर है। मंदिर के बारे में सबसे खास बात यह है कि यहां भगवान हनुमान के साथ ही शनि महाराज भी विराजे हुए हैं।
इस मंदिर में शनि महाराज एक महिला के रूप में भगवान हनुमान जी के चरणों में बैठे हुए हैं। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जिस व्यक्ति पर शनि का प्रकोप भारी रहता है, वो यहां आकर भगवान हनुमान के साथ ही शनि महाराज को भी प्रसन्न कर सकता है। यहां आने वाले सभी भक्त की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।