comedian raju shukla- बुंदेलखण्ड के फेमस कॉमेडियन राजू शुक्ला से खास मुलाकात
टीकमगढ़। तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम हो जिसको छिपा रहे हो। जगजीत सिंह ने यह मशहूर गजल शायद बुंदेलखण्ड (bundelkhand) के ख्यात कॉमेडियन राजू उर्फ राजेश शुक्ला (rajesh shukla) के लिए ही गाई होगी। उम्दा बुंदेली में हास्य परोसकर सबको गुदगुदाने वाले राजू शुक्ला ने पत्रिका के साथ मुलाकात में कई बातों को साझा किया। वह अपने व्यक्तिगत काम से आए हुए थे। इस दौरान उन्होंने अपने फैंस के साथ काफी समय व्यतीत किया।
यू-ट्यूब चैनल (youtube channel) के माध्यम से बुंदेली भाषा में सबको हंसाने वाले राजू शुक्ला (raju shukla) इन दिनों मिर्जापुर जैसी वेब सीरिज बनाने वाली लक्ष्मी प्रोडक्शन के लिए कहानी लिखने में व्यस्त है। इस वेब सीरिज का निर्देशन सौरभ वर्मा कर रहे हैं। विदित हो कि राजू शुक्ला यूपी के ललितपुर जिले के ग्राम सिंदवाहा के मूल निवासी हैं और मूल रूप से वह शिक्षक हैं। यू-ट्यूब पर खेंचू के दद्दा के रूप में राजू शुक्ला को पहचानने वाले जिले के लोगों को शायद ही पता होगा कि उन्होंने बीए और एमए की शिक्षा टीकमगढ़ के महाविद्यालय से ही प्राप्त की है। इसके बाद वह ग्वालियर चले गए थे और वहां से ड्राइंग पेंटिंग से एमए किया था। शुरूआत से ही वह बुंदेली भाषा में जहां हास्य कविताएं लिखते थे तो शुरूआत से ही उन्हें कार्टून बनाने का बड़ा शौक था। वर्तमान में यू-ट्यूब चैनल पर उनके 3 लाख से अधिक फॉलोअर्स है। शहर में पहुंचे राजू शुक्ला का नगर पालिका उपाध्यक्ष प्रतिनिधि संजय नायक, बंटी तिवारी, तारकेश्वर त्रिपाठी, दीपक शुक्ला, अजय पंडा सहित अनेक लोगों ने स्वागत किया।
बुंदेली प्रेम और हास्य की भाषा
बुंदेली में तमाम सम-सामायिक विषयों पर हास्य वीडियो बनाने वाले राजू शुक्ला (comedian raju shukla) कहते है कि बुंदेली हास्य और प्रेम की भाषा है। कालांतर में कुछ लोगों ने दुभाषिया शब्दों का प्रयोग करने के साथ ही बुंदेली लोकगीत और नृत्य के माध्यम से इसे अश्लीलता की ओर बढ़ाया था। ऐसे में प्रयास किया जा रहा है कि बुंदेली को उसके स्वाभावित रूप से उसमें बसने वाले प्रेम और हास्य के साथ लोगों की बीच लाया जाए। वह कहते है कि जब बुंदेली में हमारी मां या अन्य कोई पूछता है कि कायरे तेने रोटी खाई के नई तो बड़ा ही अपनापन और स्नेह झलकता है। वहीं खड़ी बोली में जब पूछा जाता है कि क्यो खाना खा लिया तो लगता है कि जैसे ताना दे रहे हो।
रिकार्डिंग के बाद सबसे पहले पत्नी को दिखाते
राजू शुक्ला से पूछा गया कि आप अधिकांश वीडियो में दूसरे कैरेक्टर के रुप में अपनी पत्नी को लेते है, ऐसे में वह कुछ कहती है। तो राजू शुक्ला का कहना था कि वह हर चार दिन में एक वीडियो बनाते है। जब वह अपने रिकार्डिंग रूम से बाहर निकलते है तो सबसे पहले अपनी पत्नी को वीडियो दिखाते है। यदि वह खुलकर हंस देती है तो समझ जाते है कि यह हिट होगा। वह बताते है कि पत्नी कम पढ़ी-लिखी है और विशुद्ध बुंदेलखंडी है। ऐसे में उनकी हंसी ही उनके वीडियो की टीआरपी बता देती है। राजू अब तक 350 से अधिक वीडियो बना चुके है।
सबको गुदगुदाने वाले राजू अंदर से कितने दुखी हैं, यह शायद कोई नहीं जानता। राजू बताते हैं कि उनके दो बच्चे हुए और दोनों को थैलेसीमिया (वंशानुगत रक्त विकार) बीमारी होने से असमय ही काल के गाल में समा गए। एक बच्चा जहां 11 वर्ष की आयु में चला गया तो दूसरा ढाई वर्ष ही साथ रहा। बच्चों की इस मौत ने राजू को अंदर से तोड़ दिया था। आलम यह था कि इस दुख के चलते उन्होंने नवोदय की नौकरी छोड़ी और अपनी पत्नी के साथ अपने गांव में आकर ही रहने लगे। राजू कहते है कि एक समय तो मन करता था कि भगवान के लड़ लूं, लेकिन शायद यह संभव नहीं था। ऐसे में पत्नी के साथ ही खुद को समेटा और अब उसे खुश करने के साथ ही लोगों के दुख को दूर करने के लिए भी वह हंसने और हंसाने का काम करने लगे।