
टीकमगढ़.स्नातक और स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रमों में ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हो गई है। उसके लिए सत्यापन काउंटर बनाए गए है। लेकिन छात्र-छात्राओं के साथ की जाने वाली लापरवाही में कॉलेज प्रबंधन नहीं चूक रहा है। सत्यापन के दौरान न तो छात्रों के प्रवेश के दौरान थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही, न ही सोशल डिस्टेंस का पालन किया जा रहा और न ही सैनिटाइजर का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही ५ वर्षो से करोड़ों रुपए से निर्माण किए गए भवन में प्रयोग शाला स्थानांतरण नहीं की गई है। कॉलेज प्रबंधन द्वारा हर समय विज्ञप्ति निकाकर खाना पूर्ति की जा रही है।
शनिवार को पत्रिका की टीम ने शासकीय पीजी कॉलेज के हालातों को देखा तो वहां के नजारे लापरवाही भरे दिखाई दे रहे थे। वहीं प्राचार्य की मनमानी के साथ व्यवस्थाओं की खानापूर्ति सामने आ रही थी। टैगोर भवन में प्रवेश करने के पहले दो बड़े-बड़े गड्ढे थे। अंदर जाकर देखा तो सत्यापन खिड़की के पास सफेद कलर के गोले तो लगे थे। लेकिन वहां की शर्तो पर कार्य नहीं किया जा रहा था। वहां पर कोई जिम्मेदार सत्यापन के साथ वायरस की सुरक्षा के लिए किसी भी प्रकार के कार्य नहीं किए जा रहे थे। यहां तक सत्यापन कर्ता भी बगैर मास्क के सत्यापन का कार्य कर रहे थे। इसके साथ ही नवीन भवन खाली और पुराने ही भवन में प्रयोग शाला जमी हुई थी। जबकि सिस्टम को नवीन भवन में स्थापित करने के लिए कई विज्ञप्ति निकाली गई। लेकिन कॉलेज प्राचार्य की मनमानी के कारण पांच साल से प्रयोगशाला में नए भवन में स्थापित नहीं हो पाई है।
यह रही सत्यापन की स्थिति
बगैर सेनिटाइज, थर्मल स्क्रीनिंग के साथ सोशल डिस्टेंस के छात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन के लिए १० काउंटरों को खोला गया। जिसमें आर्ट गु्रप के ४, साइंस के ४ और कॉमर्स के २ केंद्र स्थापित किए गए। इन केंद्रों में आर्ट गु्रप के ७०, बीकॉम के ७, बायलॉजी के ११ और मेथ के ३ छात्रों को प्रथम वर्ष के लिए सत्यापन किए गए है।
२०१४-१५ में हो गया था कॉलेज का नया भवन सुपुर्द
सुविधायुक्त भवन का निर्माण वर्ष २०१४-१५ में पूर्ण हो गया था। इसके बाद यह भवन कॉलेज को सुर्पुद किया गया था। लेकिन प्राचार्य की मनमानी के कारण उस भवन में न तो पूर्ण रूप से कार्यालय लग पा रहा है और न ही उसमें भौतिकी शास्त, रासायन शास्त, वनस्पति शास्त, प्राणीशास्त के साथ अन्य प्रयोग शाला स्थापित नहीं हो पाई है। यह प्रयोग शाला पुराने भवन के छोटे-छोटे कमरों में स्थापित की जा रही है। जिसमें १० से अधिक छात्रों को बैठने की व्यवस्था नहीं है। जबकि नए भवन के प्रयोग शाला हॉल में २०० से अधिक छात्र प्रयोग संबंधी एक साथ कार्य कर सकते है।
पढ़ाई की नहीं बनाई गई रणनीति
पीजी कॉलेज में वर्षो बाद प्रत्येक विषय के ४० स्थाई पीएससी रेंक के सहायक प्रोफेसर आ गए है। इसके बाद भी १२ अतिथि विद्वान के रूप में तैनात किए गए है। वहीं १३ पहले से स्थाई रूप से तैनात है। लेकिन पूर्व से अध्ययनरत छात्रों की पढ़ाई का टाइम टेबिल भी नहीं बनाया गया। जिसके कारण यहां भी व्यवस्था चौपट नजर आई है। मामले की जानकारी प्रोफेसरों से ली गई। लेकिन किसी के पास कोई जबाब और मामले की जानकारी नहीं थी।
यह रहेगी ऑनलाइन की प्रक्रिया
स्नातक का प्रथम चरण की ऑनलाइन प्रक्रिया ५ से २० अगस्त तक की जाएगी। इस चरण में छात्रों द्वारा सत्यापन कार्य किया जा रहा है। सीएलसी का तक यह ऑनलाइन सिस्टम २९ सितम्बर तक चलने की उम्मीद दिखाई दे रही है। जिसमें छात्रों को लाभ मिलेगा।
इनका कहना
कॉलेज के कार्य से भोपाल से लौटा हूं। प्रवेश प्रक्रिया प्रभारी कॉलेज में है। उनसे बात करता हूं। कोरोना काल के कारण प्रयोग शाला का स्थानांतरण नहीं हो पाया है। इस समय कॉलेज में पर्याप्त प्रोफेसर है। उनको विषय बार सेक्शन वितरण किए गए है।
डॉ. एमके नायक प्रभारी प्राचार्य पीजी कॉलेज टीकमगढ़।
सत्यापन काउंटरों पर थर्मल स्क्रीनिंग नहीं की जा रही है। उसको जल्द ही चालू किया जाएगा। इसके साथ ही काउंटर पर बैठे कर्मचारी मास्क नहीं लगा रहे है। काउंटर केंद्र पर सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं कर रहे तो नियमों का पालन करने के लिए निर्देश दिए जाएगें।
डॉ. रजनी तिवारी प्रभरी प्रवेश प्रक्रिया पीजी कॉलेज टीकमगढ़।