टीकमगढ़

फार्मर आईडी से बनेगा ई टोकन, घर बैठे तय समय पर मिलेगा यूरिया डीएपी

टीकमगढ़ नए साल की शुरुआत किसानों के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। अब यूरिया और डीएपी खाद के लिए किसानों को न तो घंटों कतार में खड़ा होना पड़ेगा और न ही चक्का जाम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। शासन ने खाद वितरण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल करते हुए ई टोकन […]

2 min read
Jan 02, 2026
किसानों को अब लाइन में नहीं लगना पड़ेगा खाद के लिए

टीकमगढ़ नए साल की शुरुआत किसानों के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। अब यूरिया और डीएपी खाद के लिए किसानों को न तो घंटों कतार में खड़ा होना पड़ेगा और न ही चक्का जाम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। शासन ने खाद वितरण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल करते हुए ई टोकन प्रणाली लागू कर दी है। जिससे किसानों को उनकी खेती के रकबे के अनुसार तय समय पर खाद उपलब्ध कराई जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत किसान फार्मर आईडी आधार आधारित पंजीयन से घर बैठे या नजदीकी एमपी ऑनलाइन व सीएससी केंद्र से ई टोकन जनरेट कर सकेंगे। यह टोकन तीन दिन तक मान्य रहेगा और उसी अवधि में किसान अपने चयनित अधिकृत विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकेगा। जिला विपणन अधिकारी अनिल नरबरे ने बताया कि जिले के 1 लाख 70 हजार से अधिक किसानों को इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा। इससे न केवल खाद वितरण में पारदर्शिता आएगी, बल्कि कालाबाजारी पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

६४ सहकारी समितियां और १९७ खाद विक्रेता

जिले में ६४ सहकारी समितियां और १९७ खाद विक्रेता पंजीकृत है। इनके तहत १ लाख ७० हजार से अधिक किसान दर्ज है और २ लाख ३१ हजार २५० हेक्टेयर के करीब में खेती करते है। इनके लिए पिछले वर्ष यूरिया १० हजार मीट्रिक टन और डीएपी १० हजार मीट्रिक टन की मांग की थी। लेकिन खाद समय पर नहीं मिल पाया था। इस कारण से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

ऐसे काम करेगी ई टोकन व्यवस्था, टोकन तीन तक रहेगा मान्य

कृषि विभाग के अनुसार पोर्टल पर पंजीकृत किसान आधार नंबर के माध्यम से लॉगिन करेगा। किसान की भूमि, रकबा और फ सल की जानकारी पहले से पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। भूमि और फ सल की वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर किसान को पात्रता अनुसार उर्वरक के लिए ई टोकन जारी किया जाएगा। किसान अपने क्षेत्र के किसी भी अधिकृत विक्रेता या संस्था का चयन कर सकता है। ई टोकन केवल तीन दिन तक मान्य रहेगा। निर्धारित समय में खाद नहीं लेने पर टोकल स्वत: निरस्त हो जाएगा और किसान को पुन: पंजीयन कराना होगा। योजना में भूमि पंजीयन और ई केवाइसी अनिवार्य रखी गई है।

एसएमएस से मिलेगी पूरी जानकारी

ई टोक्न जारी होने पर किसान को एसएमएस, मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से सूचना मिलेगी। टोकन में किसान का नाम,पंजीयन क्रमांक, उर्वरक का प्रकार और मात्रा, वितरण केंद्र, तिथि और समय अंकित होगा। इससे किसान को ये भरोसा रहेगा कि निर्धारित समय तक खाद उसके लिए सुरक्षित रहेगी।

किसान व बटाइदार भी होंगे परेशान

ई टोकन के कारण केवल व्यापारी ही नहीं, किसान भी परेशान होगा। जिनका जमीन रिकॉर्ड लिंक नहीं है। वे पटवारी के चक्कर काट रहे है। सबसे बुरा हाल बटाई पर खेती करने वालों का होगा। जो किसान डिजिटल रूप से साक्षर नहीं है। उन्हें शुरुआत में परेशानी हो सकती है। किसानों को इसके लिए कही ना काहीआक्षर ज्ञान की अवश्यता होगी।

शासन ने खाद वितरण की प्रक्रिया को नया कर दिया है। पोर्टल से ई टोकन व्यवस्था खाद के लिए मिलेगी। जो टोकन मिलेगा, वह संबंधित सेंटर पर तीन दिन के लिए मान्य होगा। एक जनवरी से यह प्रक्रिया शुरू भी हो गई है। चक्का जाम जैसी समस्याओं का अंत भी होगा।

अनिल कुमार नरबरे, डीएमओ जिला विपणन अधिकारी टीकमगढ़।

Published on:
02 Jan 2026 11:12 am
Also Read
View All

अगली खबर